कृषि विभाग में हरित जलवायु कोष गठित, ठेकों पर कटेगा 0.25% टैक्स
- बिहार हरित जलवायु कोष के माध्यम से वाहनों के निबंधन पर एक प्रतिशत सेस, रॉयल्टी पर 0.50 प्रतिशत
- सीएसआर के तहत पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई के लिए स्वैच्छिक अंशदान देना है।
सविता। पटना
जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणामों से लड़ने के लिए बिहार में हरित जलवायु कोष का गठन किया गया है। इसके तहत कृषि विभाग के सभी योजनाओं में ठेकों से संबंधित कामों में अब 0.25 प्रतिशत का टैक्स कटेगा। इस संबंध में कृषि विभाग के अवर सचिव राजेश रौशन ने आदेश जारी कर दिया है। कृषि विभाग द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, राज्य के कृषि क्षेत्र से जुड़े तमाम बड़े उपक्रमों को इस व्यवस्था से जोड़ा गया है। इनमें बिहार राज्य कृषि विपणन पर्षद, बिहार राज्य बीज निगम लिमिटेड,बिहार फल एवं सब्जी विकास निगम लिमिटेड, बिहार राज्य कृषि उद्योग विकास निगम लिमिटेड शामिल है। दरअसल, राज्य में हो रहे विभिन्न विकासात्मक कार्यों के कारण पर्यावरण और जलवायु पर पड़ रहे नकारात्मक असर को कम करने के लिए सरकार ने एक समर्पित ‘बिहार हरित जलवायु कोष’ बनाने का फैसला किया है । यह एक नॉन-लैप्सेबल फंड (गैर-व्यपगतीय निधि) होगा, जिसे ‘बिहार हरित जलवायु कोष सोसाइटी’ संचालित करेगी । इसी फंड को जुटाने के लिए कृषि विभाग सहित राज्य के सभी कार्य विभागों और निगमों के ठेकों पर 0.25% सेस लगाने का प्रावधान किया गया है, जिस पर अब कृषि विभाग ने मुहर लगा दी है।
नई गाड़ी खरीदने पर 1% सेस लगेगा
राज्य में अब कोई भी नया वाहन खरीदने पर निबंधन शुल्क (रजिस्ट्रेशन फीस) के साथ 1% अतिरिक्त सेस देना होगा। हालांकि, पर्यावरण अनुकूल पहलों को बढ़ावा देने के लिए ई-वाहनों (इलेक्ट्रिक गाड़ियों) को इस दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है । राज्य के सभी कार्य विभाग, बोर्ड और निगमों के माध्यम से होने वाले काम के अनुबंध की कुल राशि का 0.25 प्रतिशत हिस्सा इस फंड में जाएगा । बालू-गिट्टी की रॉयल्टी पर 0.50% सेस: खान एवं भूतत्व विभाग के तहत आने वाले खनिजों की रॉयल्टी राशि पर 0.50% सेस लगाया जाएगा । कॉपरेट और अंतरराष्ट्रीय फंड: इसके अलावा कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी, स्वैच्छिक दान, पर्यावरणीय आघातों की क्षतिपूर्ति राशि और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय जलवायु कोष से मिलने वाले अनुदान को भी इसमें जोड़ा जाएगा।
कभी लैप्स नहीं होगा यह पैसा, एक अलग सोसाइटी करेगी संचालन
विभाग द्वारा जारी संकल्प के मुताबिक, यह फंड ‘गैर-व्यपगतीय निधि होगा । इसका मतलब यह है कि अगर किसी वित्तीय वर्ष में इस फंड का पैसा खर्च नहीं हो पाया, तो वह लैप्स (खत्म) नहीं होगा, बल्कि अगले साल के बजट में सुरक्षित रहेगा । इस पूरे फंड की मॉनिटरिंग और संचालन के लिए एक निबंधित सोसाइटी ‘बिहार हरित जलवायु कोष सोसाइटी’ काम करेगी।
राज्य में पेड़ लगाने और प्रदूषण नियंत्रण पर राशि का होगा इस्तेमाल
इस फंड से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल राज्य में पेड़ लगाने (वनीकरण), जैव विविधता संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, पर्यावरण को लेकर जन जागरूकता अभियान और जलवायु परिवर्तन के असर को कम करने वाली विकास गतिविधियों पर किया जाएगा । इसे सर्वसाधारण की जानकारी के लिए राजकीय गजट के अगले असाधारण अंक में प्रकाशित करने का आदेश दिया गया है ।

























































































