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सोलर पंपसेट से बंजर जमीन पर सिंचाई कर महिलाएं रोक रही श्रमिकों का पलायन

  • गांवों में बदला फसल चक्र सब्जी, मक्का और नकदी फसलों की खेती कर रही खेतीहर मजदूर
  • बिहार में 3 करोड़ 20 लाख असंगठित क्षेत्र और 20-25 लाख संगठित क्षेत्र के श्रमिक हैं

सबिता। पटना
इस साल श्रमिक दिवस का थीम जलवायु परिवर्तन के बीच कार्यस्थल पर श्रमिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चित करना है। इस समस्या से बिहार के श्रमिक सबसे अधिक जूझते हैं। बाढ़ और सुखाड़ के बीच श्रमिक दूसरे राज्यों में पलायन को मजबूर होते हैं। ई-श्रम पोर्टल के अनुसार बिहार में 3 करोड़ 20 लाख असंगठित क्षेत्र और 20-25 लाख संगठित क्षेत्र के श्रमिक हैं। उत्तर बिहार में मार्च आते ही गांवों में सिर्फ बुजुर्ग, महिला और बच्चे रह जाते हैं। वे पलायन का दंश झेलते हैं। इस निराशा के बीच सोलर पंपसेट से सिंचाई कर महिलाएं पलायन रोक रही है। मुजफ्फरपुर, पटना, वैशाली और दरभंगा की 5000 से अधिक महिलाएं पलायन रोकने में लगी है। मुजफ्फरपुर के बोचहां प्रखंड की देवकी देवी को सोलर पंपसेट से बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने के लिए राष्ट्रपति से सम्मान मिल चुका है। ककराचक की देवकी देवी बताती हैं कि साल 2023 में पति की नौकरी छूट गई तो खाने पर आफत आ गई। गांव के युवा पलायन कर रहे थे, क्योंकि सिंचाई की सुविधा नहीं रहने की वजह से बरसात के बाद वह खेती नहीं कर पाती थे। उन्होंने आगा खान ग्रामीण सहायता कार्यक्रम के तहत सोलर पंपसेट लगाया और 45 एकड़ जमीन पर सिंचाई करने लगी। वह 112 किसानों को सिंचाई के लिए पानी देती है। वह बताती है कि 45 एकड़ जमीन पर सिंचाई की सुविधा नहीं रहने से बंजर जैसी स्थिति हो गई थी। अब खेतीहर श्रमिक पट्टा पर जमीन लेकर फूलगोभी, टमाटर, बैंगन, भिंडी और परवल उगा रहे हैं। पहले गर्मी आते ही गांव खाली हो जाते थे। अब गांव गुलजार रहता है। सबसे अच्छी बात यह है कि उनकी सब्जियां हाथों-हाथ बिक जाते हैं और उन्हें घर पर काम मिल जाता है। मिर्जापुर की सीतादेवी बताती हैं कि उनके चार बेटे हैं। तीन साल पहले सभी बेटे काम की तलाश में दिल्ली चला जाता था। वह जीविका से जुड़ी और ऋण पर सोलर पंपसेट लगाई। आज बेटों और पति के साथ सब्जियों की खेती कर रही हैं। इसके साथ हर दिन प्रति घंटे 100 रुपए खेतों की सिंचाई करके 800-900 रुपए भी कम रहे हैं। सीता देवी से प्रेरित होकर उनके गांव के आस-पास की 10 से अधिक महिलाओं ने सोलर पंपसेट लगाया है। इससे वहां का पलायन रुक रहा है।

बिहार में चार लेबर कोड के लिए लागू श्रम नियमावली बनी
केन्द्र सरकार के चार लेबर को लागू करने के लिए बिहार सरकार ने अपना श्रम नियमावली तैयार कर ली है। इसके तहत बिहार में काम के घंटे, कहां शिकायत करे, कैसे शिकायत करे और महिलाओं को रात्री ड्यूटी कैसे काम लिया जा सकता है। इससे संबंधित नियम बनाए जाएंगे। श्रम संसाधन विभाग द्वारा श्रमिकों के कल्याण के लिए नए नियम बनाए जा रहे हैं। श्रम संसाधन विभाग के सचिव दीपक आनंद ने बताया कि एक महीने के अंदर शर्त और नियमों बना लिया जाएगा। कैबिनेट में नियम का प्रस्ताव पास कराकर लागू कर दिया जाएगा। बिहार में श्रमिकों की स्थिति और चुनौतियों को देखते हुए नियम को बनाया जा रहा है। बिहार में असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों की संख्या सबसे अधिक है। यहां ई-श्रम पोर्टल के अनुसार 3 करोड़ 20 लाख श्रमिक असंगठित क्षेत्र के हैं और 20-25 लाख श्रमिक संगठित क्षेत्र में काम कर रहे हैं। इसलिए यहां के श्रम कोड नियमों को असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को ध्यान में रखकर बनाया जा रहा है। श्रम संसाधन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार महिला श्रमिकों से भी रात में ड्यूटी ली जाएगी। लेकिन रात्री ड्यूटी से पहले महिलाओं से मर्जी जानी जाएगी। इसके साथ जिस भी संस्थान में एक या दो महिला कर्मचारी हैं, वहां नाइट ड्यूटी नहीं लगाई जाएगी। उनके लिए सुरक्षा से संबंधित पूरी व्यवस्था होगी।

श्रम कोड क्या है?
श्रम कोड भारत सरकार द्वारा बनाए गए चार नए श्रम कानूनों का सम्मिलित नाम है। इनका उद्देश्य देश में मौजूद दर्जनों पुराने और जटिल श्रम कानूनों को सरल, आधुनिक और एकीकृत बनाना है, ताकि उद्योगों और श्रमिकों दोनों को लाभ मिले। इन चार श्रम कोड में वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता और व्यावसायिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य संहिता शामिल हैं। वेतन संहिता के तहत न्यूनतम मजदूरी, समय पर वेतन भुगतान और बोनस से जुड़े प्रावधानों को एक जगह लाया गया है। औद्योगिक संबंध संहिता में नियुक्ति, नौकरी समाप्ति और ट्रेड यूनियन से जुड़े प्रावधानों को सरल किया गया है। सामाजिक सुरक्षा संहिता ईपीएफ, ईएसआई, पेंशन और मातृत्व लाभ जैसी सुविधाओं को एकीकृत करती है, जबकि व्यावसायिक सुरक्षा संहिता में कार्यस्थल की सुरक्षा, काम के घंटे और स्वास्थ्य संबंधी नियमों को आधुनिक रूप दिया गया है।

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