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जलवायु परिवर्तन से बुजुर्गों के फेफड़े हो रहे कमजोर

बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर जलवायु परिवर्तन का असर

जलवायु परिवर्तन के साथ मौसमी उलटफेर और अतिरेक की घटनाओं में वृद्धि हो रही है। गर्मियों में लंबे समय तक तापमान अधिक और हवा की नमी कम हो जाती है जबकि सर्दियों के समय तापमान बहुत कम हो जाता है। जंगलों में अगलगी और वायु प्रदूषण में लगातार इज़ाफ़ा हो रहा है। बारिश का भी कोई निश्चित पैटर्न अब नहीं रह गया है। अक्सर बहुत कम समय में बहुत ज़्यादा बारिश हो जाती है जिससे फ्लैश फ्लड की समस्या आम होने लगी है। चक्रवातीय तूफ़ानों की संख्या और शक्ति में भी लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।

इन सबका प्रतिकूल प्रभाव रोज़ी-रोज़गार के अलावा लोगों और पर्यावरण सब के स्वास्थ्य पर पड़ने लगा है। बुजुर्गों पर इसका प्रभाव अन्य लोगों से ज़्यादा पड़ता है। वायु प्रदूषण के बढ़ने से बुजुर्गों के कमज़ोर पड़ रहे फेफड़ों पर विशेष रूप से बुरा असर पड़ता है। अस्थमा और संस संबंधी बीमारियों का प्रकोप बढ़ सकता है। जब फेफड़े ढंग से काम नहीं कर पाते तो खून में आक्सिजन की मात्र घटने लगती है। साँस में आक्सिजन की कमी के कारण दिल को ज़्यादा कम करना पड़ता है जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
हवा में नमी की कमी और अधिक तापमान की स्थिति में शरीर से पसीना ज़्यादा निकलता है और खून गाढ़ा होने लगता है। यह स्थिति पहले से कमज़ोर हृदय, किड्नी और दिमाग़ के लिए बिल्कुल भी सही नहीं है। इससे स्ट्रोक के अलावा खून की नलियों में कचरा जमने की आशंका बढ़ जाती है जिससे किड्नी, चोक हो सकती है। इसके अलावा शरीर के तापमान को संतुलित रखने के लिए दिल को ज़्यादा जोर लगाना पड़ता है।
ठंड अधिक होने और लंबे समय तक तापमान कम रहने की स्थिति में बुज़ुर्गों के लिए शरीर के तमपन को संतुलित रखना मुश्किल हो जाता है जिससे दिल का दौरा, ब्रेन स्ट्रोक और किड्नी डैमिज होने का खतरा बढ़ जाता है। फेफड़े को नुकसान पहुँच सकता है। ठंड के समय पानी पीने की इच्छा बहुत नहीं होती इसलिए शरीर में पानी की कमी होने और खून के गाढ़ा होने का खतरा भी अधिक होता है।
तेज़ या मुश्किल हालात में देर तक चलने की सीमित क्षमता के कारण फ्लैश फ्लड, बाढ़, तूफ़ान या अन्य आपदा की स्थिति में बुजुर्गों को सुरक्षित स्थान पर ले जाना मुश्किल हो जाता है। बहुत तरह के संक्रमण का खतरा बढ़ने से बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर विशेष तौर पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।