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45 वर्षीय बेल्जियम की शीला पांच सालों से परिवार को ढूंढ़ने बिहार आ रही

  • हर साल अक्टूबर से छठ तक बिहार में रहकर माता-पिता और परिवार को ढूंढ़ने का प्रयास करती है

  • वह कहती है कि अब तो बिहार का हर आदमी उनके माता-पिता जैसे लगते हैं।

सविता। पटना

बेल्जियम की 45 वर्षीय शीला पिछले पांच सालों से बिछड़े माता-पिता की तलाश में भारत आ रही हैं। हर साल दीपावली से लेकर छठ तक बिहार में गुजारती हैं और माता-पिता के  साथ परिवार की तलाश में लगी रहती हैं। हर साल कोई न कोई परिवार के रूप में सामने आता है लेकिन उनकी खुशी उस समय मायूसी में बदल जाती है जब डीएनए टेस्ट होता है। डीएनए टेस्ट के बाद फिर से उनकी तलाश शुरू हो जाती है। एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय, एडोप्सन एजेंसी लेकर संस्थाओं की खाक छानती है। फिर भी हिम्मत नहीं हारती। वह कहती है कि अब तो बिहार का हर आदमी उनके माता-पिता जैसे लगते हैं।

1981 में अपनों से बिछड़ गई थी शीला

शीला 1981 में अपनों से बिछड़ गई थी। वह भटककर पटना आ गई थी। पुलिस ने उसे पादरी की हवेली में रखा था। पादरी की हवले में राज्य का पहला एडॉप्सन एजेंसी खुला था। उस समय सिर्फ यह पता चला था कि वह मुजफ्फरपुर की है। वहीं से शीला को बेल्जियम के दंपति ने गोद लिया था। वत बताती है कि उसके रंग-रूप के कारण वहां के लोग ताने कसते थे। दोस्त कहते थे वह बाहर की है। ये बातें हमेशा अखरती थी। गोद लेने वाले माता-पिता ने खूब पढ़ाया और वह बड़ी होकर शिक्षिका बन गई। उसकी शादी वहीं के एक बिजनेसमैन से हुई है। पति का नाम अविन है। उसके तीन बच्चे हैं। वह जब भी पटना आती है अपनी बचपन की तस्वीर साथ लेकर आती है।  लोगों को अपनी बचपन की तस्वीर दिखाकर पहचान कराती है।

भारतीय संस्कृति और पर्व त्यौहारों से जुड़ी रही

शीला बताती है कि वह भले विदेश में पली बढ़ी हो, लेकिन भारतीय संस्कृति और यहां के तीज त्यौहार हमेशा अपना सा लगता था। वह बेल्जियम में भारतीय लोगों से बात करना और उनके साथ रहना अच्छा लगता था। सोशल मीडिया पर छठ की महिमा के बारे में जानने का मौका मिला। बस क्या था बच्चों के साथ दीपावली और छठ मनाने पटना आ गई।

साल 2022 में माता-पिता भी मिल गए थे, लेकिन डीएनए टेस्ट में मैच नहीं हुआ

शीला 2022 के छठ पर बहुत खुश थी। तीन साल की खोज के बाद मुजफ्फरपुर के मंसूरपुर के चमरुआ के स्वगीय तूफानी पासवान के रूप में उसे माता-पिता मिल गए थे। माता-पिता की मौत हो गई थी, लेकिन भाई और बहनों से मिली। उनके परिवार वालों ने भी गले से लगाया।  लेकिन डीएनए मैच नहीं हुआ और वह मायूस होकर बेल्जियम लौट गई।

2 Comments

  1. Alejandra4089
    17th Aug 2025 Reply

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  2. Katie3963
    21st Aug 2025 Reply

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