मानवाधिकारों की लड़ाई लड़ रहे ये योद्धा, जान से मारने की धमकी मिली, हमले हुए, फिर भी नहीं रोकी अभियान
- शिवप्रकाश राय ने 2011-12 में बिहार में 10 हजार करोड़ का धान घोटाला का उजागर किया
- सिस्टर डॉरोथी बिहार घूमने आई, लेकिन यहां के महिलाओं के लिए रुक गई
सबिता। पटना
आज पूरे विश्व में मानवाधिकारों के नियमों की धज्जियां उड़ी हुई है। रूस, यूक्रेन से लेकर गाजा, इजरायल और इरान की लड़ाई देखें, जाने की कितनें बच्चों और महिलाओं को मार दिया गया है। भारत में मानवाधिकारों की रक्षा के मामले पीछे है। पुलिस प्रताड़ना और झुग्गी झोपड़ियों पर बुल्डोजर चलाकर घर उजाड़ देना आम बात हो गई है। लेकिन इसी में कई मानवाधिकारों की रक्षा के योद्धा है, जो अपनी जान की परवाह किए बगैर लड़ाई लड़ रहे हैँ। हम आज ऐसे ही योद्धा की कहानियां बता रहे हैं, जिन्होंने मानवाधिकारों की लड़ाई लड़ते-लड़ते जेल गए, जान से मारने की धमकी मिली और हमले भी हुए, फिर भी वह नहीं रुके।
सूचना के अधिकार कानून बनाने से लेकर अधकार दिलाने की लड़ाई लड़ रहे शिव प्रकाश राय
बक्सर के रहने वाले 78 वर्षीय शिव प्रकाश राय सूचना के अधिकार कानून के तहत मानवाधिकारों की लड़ाई 20 साल से लड़ रहे हैं। इन्होंने सूचना के अधिकार का कानून बनाने के लिए भी 10 सालों की लड़ाई लड़ी। इस लड़ाई में उन्हें 29 दिनों तक जेल भी हुई, लेकिन उनका अभियान नहीं रुका। इन्होंने 2011-12 में बिहार में 10 हजार करोड़ का धान घोटाला का उजागर किया था। इसमें 1775 घोटालेबाजों पर केस हुआ था। इसके अलावे डायन प्रथा, मिड डे मील घोटाला, सिटी स्कैन मशीन घोटाला, सोलर स्ट्रीट लाइट घोटाला उजागर आम जनता को हक दिलाया
15 सालों से जेल में बंद कैदियों और बंदियों की लड़ाई लड़ रहे संतोष उपाध्याय
संतोष उपाध्याय पिछले 15 सालों से जेल में बंद कैदियों और बंदियों की लड़ाई लड़ रहे हैं। वह बंदी बचाओ अभियान के तहत बंदियों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का काम कर रहे हैं। 62 वर्षीय संतोष उपाध्याय अब तक 200 से अधिक बंदियों की आजादी की लड़ाई लडी और उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़े हैं। वह जेल में मां के साथ रह रहे बच्चों के अधिकार के लिए हाईकोर्ट में लड़ाई लड़ रहे हैं। वह बताते हैं कि महिला बंदी के बच्चों की पढ़ाई-लिखाई से लेकर पालन-पोषण का अधिकार मर रहा है। इसको लेकर उन्होंने हाईकोर्ट में पीआईएल दर्ज की। महिला बंदियों के इस लड़ाई में उन्हें जीत धीरे-धीरे जीत मिल रही है। अब सभी महिला वार्ड में अलग से किचन बन गया है। वे जेल के अस्पताल में इलाज करा पाती हैं।
आश्रय दिलाने की लड़ाई लड़ रही सिस्टर डोरोथी
सिस्टर डोरोथी आवासहीन लोगों की लड़ाई लड़ रही हैं। मूलत: गोवा की रहने वाली सिस्टर डोरोथी बिहार आई तो यहां के गरीबों की हालत देखकर खुद को रोक लिया और बिहार में आश्रयहीन, भूमिहीन और महिला अधिकारों की लड़ाई लड़ने लगी। आज बिहार में कहीं भी किसी गरीब के घर उजाड़ा जाता है। सिस्टर डोरोथी उनकी लड़ाई लड़ती हैं। पिछले 20 सालों से डोरोथी पटना में झुग्गी-झोपड़ी के लोगों को घर दिलाने से लेकर उन्हें योजनाओं से जोड़ने का काम कर रही हैं। 60 साल की उम्र में भी गरीबों के उत्थान के लिए किया गया प्रयास देखते बनता है।



















































































