तेजाब हमले की पीड़िताओं ने कहा: वह पैर पर खड़ा होना चाहती है, लेकिन कोई रोजगार नहीं
- तेजाब हमले ने आंखों की रोशनी, सूंघने और सुनने का हक छीना, अब माता-पिता ही सहारा
- पीड़िताओं ने कहा, उन्हें रोजगार चाहिए, तेजाब का जलन से ज्यादा पेट की भूख सता रही
सविता। पटना
तेजाब हमले ने आंखों की रोशनी, सूंघने और सुनने का हक छीन लिया। अब माता-पिता ही एक मात्र सहारा हैं। यह कहते हुए नवादा की तेजाब पीड़िता फफक-फफककर रोने लगी। कहती है कि उसका कसूर क्या था, उसने सिर्फ शादी करने से इनकार किया था, ऐसी सजा दी है कि अब जी पाते हैं और मर ही पा रहे हैं। माता-पिता भी अब बुजुर्ग हो गए हैं। उनके बाद उसका क्या होगा। नवादा की तेजाब पीड़िता जैसी 40 से अधिक पीड़िताओं ने दर्द, मजबूरी और बेबसी की दास्तां सुनाई।
शादी से इनकार करने पर तेजाब फेंका, आंखें और चेहरा जला
बेगूसराय की तेजाब पीड़िता कहती है कि 2007 में तेजाब हमले में उसका चेहरा और एक आंख जल गया। उसने बताया कि उसपर तेजाब फेंकने वाले जेल से रिहा हो चुके हैं। शादी कर हंसी खुशी जिन्दगी बिता रहे हैं। वह भाई-बहनों के भरोसे है। इसके बावजूद उसने हिम्मत नहीं हारी। वह पढ़ी। आस-पड़ोस के बच्चों को पढ़ाकर जिन्दगी काट रही है। वह कहती है कि वह जॉब करना चाहती है। सरकार से रोजगार देने की मांग कर रही है, ताकि वह आगे चलकर किसी पर निर्भर न रहे
छेड़खानी का विरोध किया तो जला दिया चेहरा
नालंदा के लहेरी में 2019 में 16 वर्षीय किशोरी का चेहरा और आंखें तेजाब से जला दिया गया था। उसका गुनाह सिर्फ इतना था कि उसने छेड़खानी का विरोध और शादी करने से इनकार किया था। वह बताती है कि वह अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती है, लेकिन उनके लिए कोई रोजगार नहीं है। तेजाब ने सिर्फ उसका चेहरा नहीं सपने भी जला दिए हैं।
30 साल से इंसाफ के लिए भटक रही पीड़िता
सीवान की तेजाब पीड़िता 30 सालों से इंसाफ के लिए भटक रही है। वह बताती है कि शादी से इनकार करने पर पड़ोस के ही लड़कों ने रात में घर में घुसकर तेजाब फेंक दिया था। बहुत मुश्किल से आरोपित गिरफ्तार हुए थे, लेकिन वह रिहा हो गए। आज भी एक आरोपित जेल से बाहर है। उसका चेहरा और गर्दन बुरी तरह जला हुआ है। वह दूसरों की रहम पर जीने को मजबूर हैं। कहती है कि सरकार को तेजाब पीड़िताओं के लिए अलग से रोजगार की व्यवस्था करनी चाहिए।
बिहार में बढ़ रहे हैं तेजाब हमलों की घटनाए
बिहार में एसिड अटैक के ममलों में बढ़ोतरी हुई है। 2021 में 176, 2022 में 202 और 2023 में 207 घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इनकी सहायता के लिए विभाग के स्तर पर एक हेल्पलाइन नंबर 181 भी कार्यरत है। पीड़िताओं की कॉउंसिलिंग से लेकर उन्हें हुनरमंद बनाकर आत्मनिर्भर बनाने को लेकर कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य सचिव लोकेश कुमार सिंह ने कहा कि सभी सरकारी के साथ ही सभी निजी अस्पतालों को इसके पीड़ितों को मुफ्त उपचार करना अनिवार्य है। किसी आय वर्ग के लोग इससे पीड़ित हैं, तो उन्हें मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता योजना के तहत लाभ देने का प्रावधान है। सभी तरह की चिकित्सा पीड़िता को मुफ्त उपलब्ध कराने का नियम सरकार ने बना रखा है।
दस साल की सजा और तेजाब की बिक्री पर सख्त नियम
नए कानून में एसिड अटैक के दोषियों को कम से कम 10 वर्ष और अधिकतम उम्र कैद तक की सजा का प्रावधान है। उन्होंने इसे रोकने के लिए कुछ खास नियमों को सख्ती से लागू करने की बात कही। तेजाब की बिक्री को लेकर सख्त नियम-कायदा का पालन हो और इसे तोड़ने वालों को भी सख्त सजा दिलाई जाए। लोगों को इन नियमों की जानकारी देनी चाहिए। इसे लागू करने वाले सभी हितधारकों की समुचित ट्रेनिंग कराई जाए। अगर कहीं कोई घटना होती है, तो सरकारी महकमा को तुरंत हरकत में आना चाहिए और चिकित्सीय सहायता, मुआवजा देने, कानूनी सलाह देने से लेकर सभी जरूरी मदद तुरंत मुहैया करानी चाहिए।






















































































