धिक्कार सहने वाले कुष्ठ रोगी दूसरों की कदम
एक दिन में दो से ढाई सौ चप्पलें बना रही हैं कुष्ठ आश्रम में रहने वाले लोग
खगौल स्थित कुष्ठ आश्रम के लोग भिक्षावृत्ति करने के बदल दूसरों के लिए चप्पलें बनाकर खुद की जिन्दगी संवार रहे
सविता। पटना
जिन्दगी ऐसी है कि कोई भीख भी देना नहीं चाहता। लोग अछूत मानते हैं। हमें देखकर रास्ता बदल लेते हैं, लेकिन जिन्दगी कहां रुकती है। इस ठहरी हुई जिन्दगी को हमने दूसरों के लिए चप्पलें बनाकर रफ्तार देने की कोशिश कर रहे हैं। यह कहना है कुष्ठ आश्रम में रह रही लक्ष्मी देवी का। वह बताती हैं कि एक दिन में दो से ढाई सौ चप्पलें बना लेती हैं। एक चप्पल बनाने पर दो रुपए मिलते हैं। एक दिन चार सौ रुपए तक कमा लेते हैं। जितनी मांग होती है, उतनी ही चप्पलें बनाती हैं। इससे सीधे तौर पर आठ महिला और पुरुष को रोजगार मिला है। उन्हें समाज कल्याण विभाग मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना के तहत चप्पल बनाने की मशीन मिली है। वे लोग दिनभर चप्पलें बनाती हैं। फिर विभाग के कर्मचारी आकर ले जाते हैं और यही चप्पलें बाजार में बिकती हैं। बाजार के अलावे राज्य के सभी बालगृहों में चप्पलों की सप्लाई की जाती है। कुष्ठ आश्रम के देखरेख करने वाले रमेश प्रसाद बताते हैं कि यहां थ्री इन वन मशीन लगाया जाना था, लेकिन अभी सिर्फ चप्पल ही बनता है। इससे चप्पल, कटोरी और पत्तल भी बनता है। लेकिन मशीन में कटोरी और पत्तल बनाने का सांचा नहीं बना है। इसके कारण परेशानी हो रही है। कुष्ठ रोग से मुक्त हुई महिलाएं खुद का स्वयं सहायता समूह बनाया है। महिलाओं ने दुर्गा, पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती नाम से चार स्वयं सहायता समूह बनायी है। इसके माध्यम से पैसा बचत करती हैं और समय पड़ने पर लोगों की सहायता करती हैं। पहले इनको बच्चों को कोई पढ़ाना नहीं चाहते थे। जागरूकता आयी तो सारे बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ने जाते हैं। प्रीति देवी बताती हैं कि अब यहां वही लोग भिक्षावृत्ति करते हैं जो बिल्कुल लाचार हैं।
चप्पल बनाने का प्रशिक्षण दिया गया
खगौल स्थित कुष्ठ आश्रम में 165 कुष्ठ रोगी और उनके परिवार रहते हैं। वर्तमान में 30 कुष्ठ रोगी रह रहे हैं। बाकी कुष्ठ रोग से मुक्त हो चुके हैं। वे सिर्फ भिक्षावृत्ति का काम करते थे। उनके बच्चे भी हैं। बुजुर्ग मीता देवी बताती हैं कि उन्हें 400 रुपए पेंशन मिलती है। इतने कम पैसे से कुष्ठ रोग की दवा तो मिलती ही नहीं है। चप्पल बनाने की मशीन लगने से कई लोगों को रोजगार मिला है और भी कुछ रोजगार मिल जाए तो हमें भीख नहीं मांगना पड़ेगा।
चप्पलें बन रही लेकिन बिजली का कनेक्शन नहीं
रमेश प्रसाद का कहना है कि हम चप्पलें बना रहे हैं। लेकिन कुष्ठ आश्रम में आज तक बिजली का कनेक्शन नहीं है। कई बार बिजली कनेक्शन के लिए विभाग को पत्र लिख चुके हैं। बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे बिजली कनेक्शन नहीं दे सकते हैं। मजबूरी में वे लोग बिना बिजली कनेक्शन के ही बिजली ले रहे हैं



















































































