तेजाब हमले की पीड़िताओं ने कहा: वह पैर पर खड़ा होना चाहती है, लेकिन कोई रोजगार नहीं
तेजाब हमले ने आंखों की रोशनी, सूंघने और सुनने का हक छीन लिया। अब माता-पिता ही एक मात्र सहारा हैं। यह कहते हुए नवादा की तेजाब पीड़िता फफक-फफककर रोने लगी। कहती है कि उसका कसूर क्या था, उसने सिर्फ शादी करने से इनकार किया था, ऐसी सजा दी है कि अब जी पाते हैं और मर ही पा रहे हैं। माता-पिता भी अब बुजुर्ग हो गए हैं। उनके बाद उसका क्या होगा। नवादा की तेजाब पीड़िता जैसी 40 से अधिक पीड़िताओं ने दर्द, मजबूरी और बेबसी की दास्तां सुनाई।





















































































