कृषि विभाग की लापरवाही से लेखपाल की जान गई, नौ महीने से मानदेय नहीं मिलने से थी मानसिक तनाव में थी

कृषि विभाग की लापरवाही के कारण लेखापाल रीना कुमारी की मौत हो गई। 32 वर्षीय रीना कुमारी ने पटना के नर्सिंग होम में अंतिम सांस ली। नौ महीने से मानदेय नहीं मिलने की वजह से वह मानसिक तनाव में थी। घर में वह अकेली कमाने वाली सदस्य थी। पति राम कुमार मांझी बीमार रहते हैं, इसलिए घर का खर्च रीना ही उठाती थी।

कृषि विभाग ने 30 से अधिक सेवानिवृत्त पदाधिकारियों का पेंशन अटकाया

कृषि विभाग 30 से अधिक सेवानिवृत्त पदाधिकारियों का पेंशन अटका दिया है।विभाग न तो इन कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई कर रहा है और न तो इनका पेंशन और सेवांत लाभ दे रहा है। इसके कारण सेवानिवृत्त कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति खराब हो रही है। वह कर्ज लेकर अपना खर्च उठा रहे हें। परेशान होकर एक दर्जन से अधिक कृषि पदाधिकारियों ने कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया है।

मानवाधिकारों की लड़ाई लड़ रहे ये योद्धा, जान से मारने की धमकी मिली, हमले हुए, फिर भी नहीं रोकी अभियान

आज पूरे विश्व में मानवाधिकारों के नियमों की धज्जियां उड़ी हुई है। रूस, यूक्रेन से लेकर गाजा, इजरायल और इरान की लड़ाई देखें, जाने की कितनें बच्चों और महिलाओं को मार दिया गया है। भारत में मानवाधिकारों की रक्षा के मामले पीछे है। पुलिस प्रताड़ना और झुग्गी झोपड़ियों पर बुल्डोजर चलाकर घर उजाड़ देना आम बात हो गई है। लेकिन इसी में कई मानवाधिकारों की रक्षा के योद्धा है, जो अपनी जान की परवाह किए बगैर लड़ाई लड़ रहे हैँ।

बुजुर्गों के लिए डाकघर की योजनाएं: अब सुरक्षित और नियमित आय का आसान जरिया

जिस प्रकार एकल परिवार का प्रचलन बढ़ रहा है। वृद्धावस्था में आर्थिक रूप से सक्षम होना बहुत जरूरी हो गया है।क्योंकि बुढ़ापे में अब लोग अकेले ही जिन्दगी गुजारने को मजबूर हो गए हैं। ऐसे में पैसा ही आपका सबसे बड़ा सहारा बनता है। भारतीय डाक विभाग कई ऐसी योजनाएं चला रहा है जो बुजुर्गों की जिन्दगी को आसान बना रहा है।

समाज कल्याण विभाग की सचिव बंदना प्रेयषी भोपाल की साक्षी के आईएएस बनने का सपना साकार करेंगी

बंदना प्रेयषी ने कहा कि उनका सौभाग्य है कि वह किसी बेटी के सपने को साकार करने में सहायता कर पाएंगी भोपाल के बजरिया इलाके में साक्षी के परिवार ने पढ़ाई रोककर शादी कराने की तैयारी शुरू कर दी थी रोहित भारती। पटना समाज कल्याण विभाग की सचिव बंदना प्रेयषी आईएएस बनने के लिए निकली […]

पटना में 26 साल से 77 साल के उम्मीदवार भाग्य आजमा रहे अनंत, रामानंद यादव और रामकृपाल यादव 60 साल पार

बिहार विधानसभा चुनाव के दोनों चरणों के लिए नामांकन दाखिल और वापस लेने का काम पूरा हो चुका है। यह चुनाव कई मायनों में अलग होने जा रहा है। पहली बार मधुबनी के अलीनगर से 25 वर्षीय लोक गायिका मैथिली ठाकुर सबसे कम उम्र की उम्मीदवार बनी है। अगर जीत जाती हैं तो वह सबसे कम उम्र की महिला विधायक होंगी। लेकिन पटना के 14 विधानसभा क्षेत्रों में प्रमुख पार्टियों ने सीनियर्स नेताओं पर भरोसा जताया है।

मोकामा टाल में छह फुट तक पानी, देर से बुआई होने पर हर दिन के हिसाब से 3-5 प्रतिशत उत्पादन घटेगा

मोकामा विधानसभा चुनाव में दो बाहुबली आमने-सामने हैं। एक तरफ अनंत सिंह है और दूसरी तरफ सूरजभान सिंह की पत्नी वीना देवी हैं। इसके बावजूद मोकामा टाल इलाके में इस बार भी दलहन की खेती पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। क्योंकि इस इलाके में छह फुट तक पानी भरा है और पानी निकालने की कोई व्यवस्था नहीं हो रही है। किसान पानी निकलने की आस में है। किसानों का कहना है कि टाल इलाके किसान कब तक देर से दलहन की लेट बुआई का दंश झेलता रहेगा।

62 साल की उम्र में गंगा नदी में डूबते लोगों को बचा रहे राजेन्द्र सहनी

गंगा नदी सहित अन्य सहायक नदियां उफान पर है। नदियों की धार कब देखते-देखते लोगों को खुद में समेट ले, यह कोई नहीं जानता है। नदियों के इन्हीं लहरों से लड़कर लोगों को बचाने में लगे हैं पटनासिटी के राजेन्द्र सहनी। 62 वर्षीय राजेन्द्र सहनी अब तक 5 हजारों लोगों की जान बचा चुके हैं।

स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों की बदहाल जिन्दगी, बुजुर्ग पोते-पोतियों को पेंशन की दरकार

पिछले एक महीने से स्वतंत्रता सेनानियों के पोते और पोतियां पटना में जुटे हुए हैं। वह हर दिन इस आस में रहते हैं कि नीतीश कुमार स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों को पेंशन देने की घोषणा करेंगे। पटना के बंदरबगीचा स्थित एक विधायक के आवास में शरण लिए हुए हैं। स्वतंत्रता सेनानियों के पोते और पोतियों की उम्र भी 50 साल से अधिक हो गए हैं। राज्यभर के लगभग 26 हजार स्वतंत्रता सेनानियों के लाखों परिवार के लोग हैं। जिन्हें सरकार द्वारा किसी तरह की सहायता मिलने की उम्मीद  है।

विदेश की नौकरी छोड़ मिथिला मखाना को ब्रांड बना रहे मनीष

विदेशी चकाचौंध को छोड़ 52 वर्षीय मनीष आनंद बिहार में मखाना को ब्रांड बनाने के काम में लगे हैं। कई सालों तक विदेशों में नौकरी की। लेकिन मन बिहार में रहा। वह मधुबनी जिले के जरैल गांव में अपनी पैतृक पोखर से मखाने की खेती शुरुआत की। आज 50 से अधिक लोगों को रोजगार दे रहे हैं।

सोन नदी के किनारे बसे गांवों में पेयजल संकट पर बुजुर्गों की चिंता बढ़ी

नौबतपुर के डिहरा गांव के खेतों में धान फसलें लहलहा रही हैं। नहरों में पानी लबालव है, लेकिन घरों में पीने का पानी है। ग्रामीण अयोध्या शर्मा के घर से पूरा गांव पीने के लिए काम के लिए सुबह से ही लाइन लगाए रखते हैं। क्योंकि उनके घर में समरसेबुल लगा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले एक महीने से गांव का सारे चापाकल में पानी आना बंद हो गया है। जिसका समरसेबुल है, उनके ही चापाकल में पानी है। इससे खाने-पीने से लेकर आम दिनचर्या के लिए ग्रामीणों को फजीहत झेलनी पड़ रही है।

जेपी आंदोलनकारियों की पेंशन दोगुनी, 1 अगस्त 2025 से लागू

बिहार में जेपी सेनानियों की पेंशन की राशि दोगुनी कर दी गई है। 13 अगस्त को कैबिनेट ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में 18 मार्च 1974 से 21 मार्च 1977 तक चले आंदोलन में मीसा या डीआईआर के तहत जेल में बंद रहे आंदोलनकारियों की पेंशन दोगुनी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

बुजुर्गों का कैसे मिलेगा वृद्धापेंशन का लाभ, ई-केवाईसी है बंद

राज्य में वृद्धा पेंशन की राशि 1100 रुपए हो गई हैं। इसके बाद भी 2 लाख से अधिक बुजुर्गों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है क्योंकि वृद्धापेंशन के लिए जरूरी ई-केवाईसी बंद है। जब तक बुजुर्गों के पेंशन एकाउंट का ई-केवाईसी नहीं होता है, पेंशन की राशि नहीं मिल सकेगी

पति बीमार थे, लोगों ने कहा अकेली औरत है क्या करेगी, एक साथ गाय, बकरी, हंस और मछली पालन कर बन गई लखपति

पटना के परसा की रहने वाली 45 वर्षीय मेनू कुमारी एक ही जगह पर गाय, बकरी, मुर्गा, हंस के साथ तीन तालाबों में मछली पालन कर रही है। समेकित कृषि के इस मॉडल को देखने के लिए पूरे बिहार से अधिकारी, प्रशिक्षु पदाधिकारी और छात्र आते हैं।

70 वर्षीय अनुप राज यादव छत पर ही उगा रहे हैं आम, अमरूद, आंवला, नींबू और सब्जियां

अनुप राज यादव से प्रेरित होकर आस-पड़ोस के लोगों ने छतों पर बागवानी करनी शुरू कर दी है। मिट्टी को उर्वर बनाए रखने के लिए गाय का गोबर खाद के रूप में इस्तेमाल करते हैं। सविता। पटना शहरों में घटती हरियाली और बढ़ता प्रदूषण के बीच सांस लेना मुश्किल हो जाता है। हम आरा जिले […]

बड़ा सवाल: बिहार में बढ़ी हुई पत्रकार पेंशन की राशि का लाभ कितने पत्रकारों को मिलेगा

बिहार में पत्रकारों को सेवानिवृत्त होने पर 6 हजार के बदले 15 हजार रुपए प्रति महीने पेंशन मिलेगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 26 जुलाई को ट्वीट के माध्यम से यह जानकारी दी है। मुख्यमंत्री ने इसे तुरंत लागू करने के निर्देश भी दे दिए हैं। यानी आज भी कोई पत्रकार सेवानिवृत्त होता है तो उन्हें बढ़ी हुई पेंशन की राशि मिलेगी। गरीब पत्रकारों के लिए यह खुशी की बात है। लेकिन सवाल उठता है आखिर इस योजना का लाभ कितने पत्रकारों को मिल सकेगा और कैसे मिलेगा।

सेवानिवृत्ति की उम्र सीमा 65 साल क्यों नहीं ?

60-62 साल के होते हैं, लेकिन शरीर से स्वस्थ रहते हैं और समाज पर बोझ बनना नहीं चाहते हैं।सेवानिवृत्त होने वाले ऐसे 60 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी कोई न कोई जॉब करते हैं या सेवा दे रहे हैं। सवाल यह उठता है कि जब लोग खुद को बुजुर्ग नहीं मान रहे हैं तो सरकार क्यों जबरदस्ती कम उम्र में सेवानिवृत्त करने पर तुली है।

45 वर्षीय बेल्जियम की शीला पांच सालों से परिवार को ढूंढ़ने बिहार आ रही

बेल्जियम की 45 वर्षीय शीला पिछले पांच सालों से बिछड़े माता-पिता की तलाश में भारत आ रही हैं। हर साल दीपावली से लेकर छठ तक बिहार में गुजारती हैं और माता-पिता के  साथ परिवार की तलाश में लगी रहती हैं। हर साल कोई न कोई परिवार के रूप में सामने आता है लेकिन उनकी खुशी उस समय मायूसी में बदल जाती है जब डीएनए टेस्ट होता है।

गुजरात के अलंग में जहान काटते हुए मर चुके हैं 500 से अधिक बुजुर्ग श्रमिक

छपरा, सीवान, नवादा, शेखपुरा के पांच हजार से अधिक मजदूर जहरीले समुद्री जहाज काटने का काम कर रहे हैं। पिछले पांच सालों में समुद्री जहाज काटते हुए 500 से अधिक मजदूरों की मौत हो चुकी है। उन्हें मुआवजा के तौर पर एक लाख रुपए मिलते हैं। मजदूर जहां काम करते हैं वहां न पीने का पानी और स्वास्थ्य सुविधाएं हैं। 

भाई-बहनों के अटूट प्रेम की कहानी : भाई की रक्षा करने वाले से ही शादी करने की रखी शर्त

भाई-बहनों के अटूट प्रेम की कहानी तो सुनते ही हैं, लेकिन दो बहनों द्वारा भाई की रक्षा करने की शर्त पर ही शादी की रजामंदी देने की बात पहली बार बताने जा रहे हैं। बहनों द्वारा भाई का रक्षा कवच बनने की यह कहानी है राजधानी पटना के दुजरा की। रागिनी, संगीता दो बहनें हैं और इनके भाई का नाम है राजकिशोर। राजकिशोर दोनों बहनों से बड़े हैं। एक भाई की हत्या साल 2004 में कर दी गई थी। छोटे भाई बृजकिशोर की मौत के बाद पिता लल्लू लाल चौधरी और मां प्रभावति देवी भी गम में गुजर गई। बहनों की शादी हो जाए, इस इंतजार में भाई ने शादी नहीं की तो बहनाें ने भाई की रक्षा कौन करेगा, इस चिंता में शादी नहीं की। राजकिशोर की उम्र 53 साल है। रागिनी 51 और संगीता 48 साल की है। रागिनी प्रशासनिक सुधार मिशन में कम्प्यूटर ऑपरेटर है। संगीता सरकारी स्कूल में शिक्षिका है और भाई राजकिशोर लीगल एडवाइजर हैं।

बुजुर्गों को फाइलेरिया और बेटियों को एनिमिया से बचा रहे मनीष मुखिया

बांका के खरहरा पंचायत के 42 वर्षीय मुखिया मनीष कुमार को इस साल फाइलेरिया उन्मूलन के क्षेत्र में उत्कृष्ठ काम करने के लिए पंचायती राज विभाग ने पुरस्कृत किया है। वह बुजुर्गों को फाइलेरिया से बचाने के लिए मास ड्रग एडमिस्ट्रेशन करा रहे हैं। इससे उनका गांव फाइलेरिया उन्मूलन की तरफ रुख किया है।

बांका के 200 एकड़ पत्थरीली बंजर जमीन पर आम, अमरूद, शीशम, सागवान की खेती कर बनाया हरा-भरा

भूमि संरक्षण विभाग के जलछाजन के शुष्क बागवानी योजना के तहत खेत के पास तालाब,कुआं और पम्पसेट के माध्यम से सिंचाई सुविधा मुहैया कराकर 99 हेक्टेयर बंजर भूमि पर फूल खिला रहे बांका, जमुई, गया और पटना के बंजर जमीन पर तालाब, कुएं और पम्पसेट से सिंचाई की सुविधा मुहैया कराकर बदल रहे गांव की […]

बुजुर्ग स्थिर हैं, टारगेट भी बुजुर्ग, लेकिन वोटर लिस्ट में शामिल होने की मुश्किलें रहेंगी

बिहार सरकार के आंकड़ों के अनुसार इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के लाभार्थी 35 लाख 59 हजार 667 है। वहीं मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना के तहत 49 लाख 56 हजार 103 बुजुर्गों को पेंशन मिलता है। जिनको पेंशन मिलता है, उनका वोटर पुनरीक्षण भी मुश्किल होगा, लेकिन बीएलओ का मुख्य लक्ष्य बुजुर्गों को ही जोड़ना है। क्योंकि बुजुर्ग जल्द अपना मंतव्य नहीं बदलते। बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहे शांत रक्षित बताते हैं जितने प्रकार के दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, उतने दस्तावेज तो बुजुर्गों के पास भी नहीं होगा।

बिहार में कृषि वैज्ञानिकों को जबरदस्ती 65 के बदले 62साल में कर दिया रिटायर्ड

बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर ने आठ कृषि वैज्ञानिकों को 65 साल के बदले जबरदस्ती 62 साल में सेवानिवृत्त कर दिया गया। हद यह है कि न तो सेवानिवृत्ति की शर्तों को लागू किया गया और न समय से पहले कृषि वैज्ञानिकों को इसकी सूचना पहले दी गई। इसमें एक कृषि वैज्ञानिक को 31 दिसंबर 2024 को और 7 कृषि वैज्ञानिकों को 31 जनवरी 2025 की शाम पांच बजे अचानक ईमेल से पता चला कि वे सेवानिवृत्त हो गए हैं।

खेतों में मजदूरी करने वाली 7महिलाएं बनी फॉर्मर प्रोड्यूसर कंपनियों की मालकिन

राज्य की सात मखाना उत्पादक कंपनियों की मालकिन महिलाएं बन गई है। सभी सात कंपनियों का नाम महिला स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर रखा गया है। इन मखाना उत्पादक कंपनियों का काम मखाना उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और देश-विदेश में निर्यात करना है। सबसे खास बात यह है कि मखाना उत्पादक कंपनियों में 100 प्रतिशत महिलाएं ही कार्यरत है। पूर्णिया, सहरसा, कटिहार, किशनगंज, सहरसा, सुपौल और सहरसा में महिला उत्पादक कंपनी बनाई गई है। इन कंपनियों को साल 2023-25 के बीच बनाया है।

पंद्रह सालों से कैदियों के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं 62 वर्षीय संतोष उपाध्याय

रोहतास के  डेहरी के रहने वाले संतोष उपाध्याय बताते हैं कि बिहार के जेलों में बंद महिला कैदियों की स्थिति काफी खराब है। वह बच्चों के साथ जेल में रहती हैं। उनके बच्चों की पढ़ाई-लिखाई से लेकर पालन-पोषण का अधिकार मर रहा है। इसको लेकर उन्होंने हाईकोर्ट में पीआईएल दर्ज की। महिला बंदियों के इस लड़ाई में उन्हें जीत धीरे-धीरे जीत मिल रही है। अब सभी महिला वार्ड में अलग से किचेन बन गया है। वे जेल के अस्पताल में इलाज करा पाती हैं। इससे उनके अंदर का तनाव कम हो रहा है और अपने साथ हो रही अत्याचार के खिलाफ आवाज उठा पाती हैं।

गंगा बचाओ अभियान और लावारिश लाशों को अधिकार दिलाने वाले 61 वर्षीय गुड्डु बाबा की लड़ाई जारी है

पटना के गुड्डु बाबा गंगा बचाओ अभियान से जुड़े उस शख्स का नाम है, जिन्होंने लावारिश लाशों को भी मानवता का अधिकार दिलाया। गंगा में प्रवाहित लाशों को निकालकर दाह संस्कार कराए। गंगा को लावारिस लाशों की गंदगी से बचाने की इसकी लंबी लड़ाई लड़ी और आज भी उनकी लड़ाई जारी है। व्यवस्था, मानवता और हक-हुकुक के लिए।

शादी के बाद जिम्मेवारियों के बीच शौक व हुनर को छोड़ने वाली गृहणियां फिर से सीख रही हैं कथक

हर शख्स में एक हुनर छुपा होता है, जो जिम्मेवारियों के बीच दब सी जाती है। लेकिन कभी मरता नहीं। उम्र के किसी पड़ाव पर जब भी मौका मिलता है, इसे जिन्दा करना ही जिन्दगी का असली मजा है। पटना के नृत्यकला मंदिर में दो दर्जन से अधिक महिलाएं कथक सीखकर बचपन के खोए हुए हुनर को मंच दे रही हैं। 40 की उम्र पार करने के बाद रेशा सिंह, रश्मि सिन्हा, तृषा बंका, कविता अग्रवाल और दीप्ति ने कथक से फिर से जीना सीखा है।

अकेले रहने वाले बुजुर्गों पर गहरता जा रहा है डिजिटल अरेस्ट कर साइबर ठगी

अकेलापन, डिजिटल साक्षर नहीं होना और अपनी जिन्दगी को चिंतित बुजुर्ग साइबर अपराधियों के निशाने पर हैं। बिजली बिल, एकाउंट अपडेट और उनके सगे-संबंधियों को गिरफ्तार करने के नाम पर बुजुर्गों को डिजिटल अरेस्ट कर करोड़ों रुपए ठग रहे हैं। गुरुवार को पटना के पत्रकारनगर में पीएमसीएच से सेवानिवृत्त डॉक्टर दंपति को साइबर अपराधियों ने 12 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट किए रखा और 1 करोड़ 95 लाख रुपए ठग लिए। पिछले साल भी कदमकुआं में सेवानिवृत्त महिला प्रोफेसर से तीन करोड़ रुपए ठग लिए थे।

धिक्कार सहने वाले कुष्ठ रोगी दूसरों की कदम

जिन्दगी ऐसी है कि कोई भीख भी देना नहीं चाहता। लोग अछूत मानते हैं। हमें देखकर रास्ता बदल लेते हैं, लेकिन जिन्दगी कहां रुकती है। इस ठहरी हुई जिन्दगी को हमने दूसरों के लिए चप्पलें बनाकर रफ्तार देने की कोशिश कर रहे हैं।

इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ 51 वर्षीय रामजीत खेत में चमका रहे किस्मत

रामजीत शर्मा पढ़-लिखकर इंजीनियर बनना चाहते थे। लेकिन, उनकी किस्मत खेती कब मुड़ गई, पता भी नहीं चला।। धान और गेहूं के बीजों में नकली बीज मिले रहते थे। इसकी जांच बिहार राज्य बीज निगम से करवायी।

महिलाओं में बढ़ रहा एचआईवी का खतरा, बढ़ती उम्र के साथ अधिक सतर्क रहने की जरूरत

महीने में 50-60 महिलाएं एचआईवी और हेपेटाइटिस से ग्रसित मिल रही हैं। एचआईवी उस समय पकड़ में आती है जब महिलाओं को प्रसव में परेशानी आनी शुरू होती है।

वृद्धावस्था में होने वाली बीमारियों के कारणों को जानना जरूरी

वृद्धावस्था सिर्फ आपको शारीरिक रूप से कमजोर नहीं बनाता है, बल्कि आर्थिक और सामाजिक स्तर पर भी शिथिल कर देता है। लोग खुद को बेकार समझने लगते हैं। मानसिक स्वास्थ्य पर सबसे अधिक असर पड़ता है। सामाजिक सुरक्षा मिलना चुनौती हो जाती है। विदेशों में 60 की उम्र पार करने के बाद लोगों को सामाजिक ही आर्थिक सुरक्षा की पूरी गारंटी सरकारी योजनाओं में सम्मलित रहता है। बिहार ही नहीं देश के किसी भी हिस्से में यह व्यवस्था नहीं है। यूके में जेरियाट्रिक्स डॉक्टर अनिल कुमार बताते हैं कि वृद्धावस्था में लोग बातें भूलने लगते हैं।

दीघा दूधिया मालदह आम को संरक्षित किया जाए, तभी जीआई टैग मिलेगा

दीघा दूधिया मालदह आम को जीआई टैग दिलाने की पहल हो रही है। लेकिन दीघा में अब मात्र 100 पेड़ ही दूधिया मालदह की रह गया है। ये सारे पेड़ भी अब जैसे-तैसे बचे हैं। शहरीकरण में इन पेड़ों की भी बली चढ़ाने की कोशिश जा रही है। इस साल इन पेड़ों अच्छे मंजर आए हैं, लेकिन कृषि विभाग की ओर से दीघा दूधिया मालदह को संरक्षित नहीं किया जा रहा है। यह कहना है दीघा के सुधीर कुमार का। 45 वर्षीय सुधीर कुमार बताते हैं कि आज उनके परदादा द्वारा लगाए गए दीघा दूधिया मालदह आम खत्म हो रहा है और वह कुछ नहीं कर सकते हैं।

दलित बस्ती में जलायी शिक्षा की लौ

सुधा वर्गीज-आज के जमाने में जब आदमी खुद की दुनियां मे सिमट कर रह गया। वहीं दूसरे प्रदेश से आयी एक महिला ने दलित बस्ती की लड़कियों की शिक्षा के लिए न केवल लड़ी बल्कि समाज में मानवता की परिभाषा से लोगों को फिर से सोचने को मजबूर कर दिया। 1987 ई में केरल मूल की सुधा वर्गीज बिहार के लोगों के बारे जानने के लिए पटना के दानापुर आयी। यहां आकर देखा कि मुसहर जाति के बच्चे जो स्कूल जाने की उम्र में तितर,बटेर मार रहे हैं। दिनभर एक-इधर बेकार कामों में लगे हैं। यह सब देख देखकर वह बहुत दुखी हुई। उन्होंने तय किया की अशिक्षा की इस खाई को सिर्फ शिक्षा ही मिटा सकती है।

महिलाओं को सुरक्षित माहौल देने के लिए सुनसान रास्तों, पुल, गलियों की सोशल ऑडिट कर रही जीविका दीदियां

एक साल में सौ जीविका दीदियों ने 200 जगहों की सेफ्टी ऑडिट कर बनाया है सुरक्षित जीविका अधिकार केन्द्र से जुड़ी दीदियां महिलाओं और लड़कियों को हिंसा से बचाने के लिए कर रही हैं सेफ्टी ऑडिट पटना खुद की पहचान बनानी है तो घर से बाहर निकलना जरूरी है। लेकिन कई लड़कियां और महिलाएं रास्ते […]

आयुष्मान कार्डधारी बुजुर्गों को इलाज कराने में टूट रही हिम्मत

25-25 दिनों से ऑपरेशन के इंतजार में हैं आयुष्मान कार्डधारी मरीज सविता। पटना राजधानी के लोक जयप्रकाश नारायण हड्डी रोग अस्पताल में आयुष्मान कार्डधारी बुजुर्ग मरीजों को न समय में ऑपरेशन हो रहा है और सही इलाज हो रहा है। नि:शुल्क इलाज और गरीबी के कारण हाथ-पैर और कमर की हड्डी के ऑपरेशन के लिए […]

कठपुतली नृत्य से शिक्षा एवं सामाजिक जागरूकता करते सुनील

कठपुतली जब जल जीवन हरियाली की बात करें तो शहरी लोगों के साथ साथ ग्रामीण लोग भी पर्यावरण जैसे गंभीर विषय को सरल व सहजतापूर्वक समझ जाते हैं।गीत संगीत कहानियों के माध्यम से कठपुतली सामाजिक विज्ञान,समाज सुधार अभियान को लेकर शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से देश समाज में जागरूक करने वाले सरला श्रीवास सामाजिक सांस्कृतिक शोध संस्थान के संयोजक लोक कलाकार सुनील कुमार मुजफ्फरपुर जिले के मुसहरी प्रखंड मालीघाट निवासी कठपुतली कला का प्रशिक्षण देते है।

दो वक्त की रोजी रोटी की मोहताज 12 महिलाओं ने सिक्की के सामान बनाकर बनी लखपति दीदी

पटना एयरपोर्ट से लेकर दिल्ली हाट में बिकते है सिक्की से बने टोकरी, डलियां, आर्टिफिशल ज्वेलरी और साज सज्जा के सामान जीविका दीदियां कुशग्राम बनाकर देश- विदेश में हुई मशहूर सविता। पटना गरीबी का हाल मत पूछिए, एक दिन खाते थे तो दूसरे दिन उपासे रहना पड़ता था। खेतों में सालों भर काम नहीं मिलता […]

बिहार में ओलंपिक के लिए तैराक तैयार करने में लगे हैं 48 वर्षीय पंकज

राष्ट्रीय स्तर का स्विमिंग पुल का नहीं होना, खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ी परेशानी जब खुद नहीं बन पाए राष्ट्रीय स्तर का तैराक को बेटी को बना दिया तैराक सविता। पटना तैराकी करना मेरा शौक है। बचपन में घर में बिना बताए गंगा नदी में तैरने चला जाता था। घर में पिटाई के डर से […]