सोन नदी के किनारे बसे गांवों में पेयजल संकट पर बुजुर्गों की चिंता बढ़ी

पटना में 8 दिनों तक झमाझम बारिश, फिर भी भूगर्भीय जलस्तर में नहीं आ रहा है सुधार
पटना के नौबतपुर, पालीगंज, बिहटा, बिक्रम में बरसात में भी पेयजल संकट, बिजली नहीं रहने पर प्यासे रहने की नौबत
सविता। पटना
नौबतपुर के डिहरा गांव के खेतों में धान फसलें लहलहा रही हैं। नहरों में पानी लबालव है, लेकिन घरों में पीने का पानी है। गांव के बुजुर्ग इस सोच में डूबे हैं कि अचानक से जलस्तर का यह कैसा संकट आया है। सोन के किनारे बसे उनके गांवों में पीने के पानी की कभी दिक्कत नहीं थी। आखिर सोन का स्रोत कहां चला गया, जिससे उन्हें पानी मिला करता था। जल संकट का सामना बुजुर्गों को ही अधिक करना पड़ रहा है। क्योंकि नहाने-खाने तक की दिक्कत हो गई है। 70 वर्षीय अयोध्या शर्मा के घर से पूरा गांव पीने के लिए काम के लिए सुबह से ही लाइन लगाए रखते हैं। क्योंकि उनके घर में समरसेबुल लगा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले एक महीने से गांव का सारे चापाकल में पानी आना बंद हो गया है। जिसका समरसेबुल है, उनके ही चापाकल में पानी है। इससे खाने-पीने से लेकर आम दिनचर्या के लिए ग्रामीणों को फजीहत झेलनी पड़ रही है। यह हाल उस समय है जब 22 जुलाई से 4 अगस्त तक राजधानी में झमाझम बारिश हुई है। अमरपुरा गांव के बुजुर्गों का कहना है कि पिछले दो साल से गर्मी के दिन में चापाकल में जो लेयर भागता है, सितम्बर में जाकर आता है। जिनके घरों में 60 फीट का गहरी बोरिंग है, उसमें भी थोड़ा-थोड़ा ही पानी आना शुरू हुआ है। लेकिन यह बारिश पेयजल की संकट को पूरा नहीं कर सकता है। पीने के पानी का संकट सिर्फ नौबतपुर ही नहीं पालीगंज, बिक्रम, बिहटा तक है। बिक्रम के गोपालपुर की ग्रामीण रेणु देवी बताती है चापाकल में पानी नहीं आ रहा है। बिजली का संकट गहरा गया है। इसके कारण नल-जल का पानी लोगों का सही रूप में नहीं मिल पा रहा है। रेणु देवी बताती हैं कि इनके गांव के दलित टोला में दो महीने से पीने का पानी का घोर संकट है। दस दिन पहले तक खेत की सिंचाई के लिए पानी मिल रहा था। और खजूरी गांवों में पीने के पानी के लिए मारामारी है। गांव के लोगों का एकमात्र सहारा नल-जल का ही पानी है।
अधिकांश घरों में नल-जल का पाईप फट गया है
अधिकांश घरों में नल-जल का पाईप फट गया है, मोटर काम नहीं कर रहा है, इससे  नल-जल पर टिके हैं, लेकिन पिछले एक सप्ताह से पटना में झमाझम बारिश हो रही है। बिक्रम के बाघाकोल के किसान रामजीत शर्मा बताते हैं कि बारिश के बाद भी भूमिगत पालीगंज के मसौढ़ा पंचायत के अंजनी कुमार बताते हैं कि यहां के दस पंचायतों में अब भी पेयजल का संकट बना हुआ है। वह बताते हैं कि इस इलाके में बेतरतीव बालू के खनन के वजह से जलस्तर में लगातार भाग रहा है। महाबलीपुर अकुरी पंचायत, कल्याणपुर पेयपुरा पंचायत सरसी पिपरदाहा और दुल्हिन बाजार के रनिया तालाब में पेयजल के लिए मारामारी है। बिहटा के कंचनुपर के किसान सुधांशु सिंह बताते हैं कि पूरे सोन नदी के किनारे पेयजल की समस्या बनी हुई है, हालांकि धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।
क्या कहते हैं
ये सारे इलाके सोन नदी के जलस्रोत से जुड़े हुए है। भूगर्भीय जल का बड़ा हिस्सा सोन नदी जलस्रोत से जुड़ा हुआ है। आबादी बढ़ने और खेती के आधुनिकीकरण ज्यादा जल की मांग होने लगी। सोन का जलस्तर ऊंचा था तो भूगर्भीय जल में निरंतरता बनी रही। बालू का लगातार निकासी के कारण सोन का जलस्तर नीचे चला है। इससे भूगर्भीय जल को होने वाली आपूर्ति बाधित हो गई। कुछ क्षेत्र में जलस्तर नीचे चला गया है, वहां पर बरसात का भी कमी को पूरा नहीं कर पाया है। इसे कारण भूगर्भीय पानी ऊपर नहीं है। इसका दोहन रोकना होगा और वैज्ञानिक तरीके से संतुलन बनाना होगा।
डॉ आशुतोष उपाध्याय, भूमी एवं जलप्रबंधन प्रभाग, आईसीएआर पटना

2 Comments

  1. Crystal1942
    21st Aug 2025 Reply

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  2. Nikita4269
    21st Aug 2025 Reply

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