आज पूरे विश्व में मानवाधिकारों के नियमों की धज्जियां उड़ी हुई है। रूस, यूक्रेन से लेकर गाजा, इजरायल और इरान की लड़ाई देखें, जाने की कितनें बच्चों और महिलाओं को
बांका के खरहरा पंचायत के 42 वर्षीय मुखिया मनीष कुमार को इस साल फाइलेरिया उन्मूलन के क्षेत्र में उत्कृष्ठ काम करने के लिए पंचायती राज विभाग ने पुरस्कृत किया है।
भूमि संरक्षण विभाग के जलछाजन के शुष्क बागवानी योजना के तहत खेत के पास तालाब,कुआं और पम्पसेट के माध्यम से सिंचाई सुविधा मुहैया कराकर 99 हेक्टेयर बंजर भूमि पर फूल
राज्य की सात मखाना उत्पादक कंपनियों की मालकिन महिलाएं बन गई है। सभी सात कंपनियों का नाम महिला स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर रखा गया है। इन मखाना उत्पादक कंपनियों
पटना के गुड्डु बाबा गंगा बचाओ अभियान से जुड़े उस शख्स का नाम है, जिन्होंने लावारिश लाशों को भी मानवता का अधिकार दिलाया। गंगा में प्रवाहित लाशों को निकालकर दाह
जिन्दगी ऐसी है कि कोई भीख भी देना नहीं चाहता। लोग अछूत मानते हैं। हमें देखकर रास्ता बदल लेते हैं, लेकिन जिन्दगी कहां रुकती है। इस ठहरी हुई जिन्दगी को हमने
रामजीत शर्मा पढ़-लिखकर इंजीनियर बनना चाहते थे। लेकिन, उनकी किस्मत खेती कब मुड़ गई, पता भी नहीं चला।। धान और गेहूं के बीजों में नकली बीज मिले रहते थे। इसकी
एक साल में सौ जीविका दीदियों ने 200 जगहों की सेफ्टी ऑडिट कर बनाया है सुरक्षित जीविका अधिकार केन्द्र से जुड़ी दीदियां महिलाओं और लड़कियों को हिंसा से बचाने के
कठपुतली जब जल जीवन हरियाली की बात करें तो शहरी लोगों के साथ साथ ग्रामीण लोग भी पर्यावरण जैसे गंभीर विषय को सरल व सहजतापूर्वक समझ जाते हैं।गीत संगीत कहानियों
पटना एयरपोर्ट से लेकर दिल्ली हाट में बिकते है सिक्की से बने टोकरी, डलियां, आर्टिफिशल ज्वेलरी और साज सज्जा के सामान जीविका दीदियां कुशग्राम बनाकर देश- विदेश में हुई मशहूर
राष्ट्रीय स्तर का स्विमिंग पुल का नहीं होना, खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ी परेशानी जब खुद नहीं बन पाए राष्ट्रीय स्तर का तैराक को बेटी को बना दिया तैराक सविता।
गंगा में मछली मारने की आजादी दिलाने वाले जाहिद अंसारी ने गंगा मुक्ति आंदोलन किया सुल्तानगंज से पीरपैंती तक 80 किलोमीटर में पानीदारी कानून लगाकर कर मछुआरों से टैक्स वसूलते
छोटे बाबू नहीं रहे। वह विश्व संवाद केन्द्र के संस्थापक थे। बेहद ही शालिन थे और समाज के प्रति समर्पित व्यक्ति थे। छह अक्टूबर को लंबी बीमारी के बाद अंतिम
समाज सेवा का मतलब समाज के प्रति समर्पण होता है। इस बात का जीता जागता उदारहण हैं मंजू डुंगडुंग।पैरों में हवाई चप्पल,कंधे पर कपड़े का थैला और आंखों में दलितों
घर में रहकर ठेकुआ, खजुरी, निमकी, अचार, दनौरी, अदौरी के अलावे कई तरह के मिक्चर बनाती हैं सविता।पटना बोरिंग रोड के चिल्ड्रेन पार्क के सामने 52 वर्षीय मंजू झा और
पहली ट्रांसजेंडर दारोगा के परिवार को गांव छोड़ने का फरमान, नहीं माने तो की मारपीट बांका के पंजवारा गांव की पहली ट्रांसजेंडर दारोगा ने दर्ज कराई है प्राथमिकी सविता। पटना
सविता। पटना तीन बेटा, तीन बेटी, बेटी। एक बेटा दारोगा, खुद आर्मी से सेवानिवृत्त हैं और आज वृद्धाश्रम में जिन्दगी गुजारनी पड़ रही है। बेटा-बेटी बाट जोहते-जोहते आंखें पथरा गई
डॉ भीम राव अम्बेडकर ने कहा था कि शिक्षा शेरनी का दूध है जो जितना पियेगा, उतना ही अधिक दहाड़ेगा। लेकिन आज वरीय नागरिकों, महिलाओं और कामकाजी लोगों को दूरस्थ
1685 बच्चे, महिला, बुजुर्ग और मानसिक दिव्यांग लोगों को घर पहुंचा चुके हैं सविता। पटना समस्तीपुर के सुमित कुमार पिछले 15 सालों से भूले-भटके बच्चे, बुजुर्ग महिला और मानसिक दिव्यांग
बुढ़ापा का मतलब बेरंग जिन्दगी नहीं, बल्कि पार्टियों में सलीके से सज-संवर जाए : प्रोफेसर टोनी शर्मा वृद्धावस्था का मतलब मौसम के सभी रंगों को खुद में समेटना और जीना