मोकामा टाल में छह फुट तक पानी, देर से बुआई होने पर हर दिन के हिसाब से 3-5 प्रतिशत उत्पादन घटेगा
- पटना, नालंदा, शेखपुरा, लखीसराय के 1 लाख 6 हजार 200 हेक्टेयर में होती है दलहन की खेती
- दलहन की बुआई का सही समय 15-25 अक्टूबर तक होती है
सविता। पटना
मोकामा विधानसभा चुनाव में दो बाहुबली आमने-सामने हैं। एक तरफ अनंत सिंह है और दूसरी तरफ सूरजभान सिंह की पत्नी वीना देवी हैं। इसके बावजूद मोकामा टाल इलाके में इस बार भी दलहन की खेती पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। क्योंकि इस इलाके में छह फुट तक पानी भरा है और पानी निकालने की कोई व्यवस्था नहीं हो रही है। किसान पानी निकलने की आस में है। किसानों का कहना है कि टाल इलाके किसान कब तक देर से दलहन की लेट बुआई का दंश झेलता रहेगा। मोकामा के किसान आनंद मुरारी कहते हैं कि दलहन की बुआई 15 से 25 अक्टूबर तक होती है। लेट बुआई होने से उत्पादन पर असर पड़ता है। दलहनी फसलों पर कीट-पतंगों का आक्रमण बढ़ता है। इसके बावजूद कोई भी टाल इलाके से पानी निकालने की व्यवस्था नहीं कर रहा है। किसानों के अनुसार क्षेत्र से जल निकासी के लिए जल संसाधन विभाग को पत्र भी लिखा गया है, फिर से पानी निकालने की कोई पहल नहीं हो रही है। नवंबर माह से प्रत्येक दिन विलंब से बुआई होने पर औसतन 3-5% उत्पादन कम होता चला जाता है।जितना ज्यादा विलंब से बुआई होगी मसूर का उत्पादन उतना ही प्रभावित होगा।
एक लाख 6 हजार 200 हेक्टेयर में होती है दलहन की खेती
मोकामा टाल इलाके को दाल का कटोरा कहा जाता है। मोकामा टाल का कुल रकवा 1 लाख 6 हजार 200 हे0 है।यह अलग-अलग टाल क्षेत्र,फतुहा-5200 हेक्टेयर, बख्तियारपुर-16 हजार 800 हेक्टेयर, बाढ़-13 हजार 200 हेक्टेयर,मोर-21हजार हेक्टयर, मोकामा-20 हजार 500 हेक्टेयर, बड़हिया-17 हजार100 हेक्टेयर, सिंघौल-12 हजार400 हेक्टेयर में खेती होती है। इस संपूर्ण टाल क्षेत्र के लगभग 80 हजार हेक्टेयर रकवा में मसूर की बुआई होती है।अच्छी पैदावार के लिए इस टाल क्षेत्र में कई दशकों से मसूर की बुआई 15-25 अक्टूबर के बीच या चितरा नक्षत्र में सर्वोत्तम मानी जाती है।अगर इस समय मसूर की बुआई होती है तो औसतन प्रति बिगहा 12 मन या प्रति हेक्टेयर 50 मन/20 किउंटल/2 टन का उत्पादन तय माना जाता है। मोकामा के किसान ओम प्रकाश बताते हैं कि एक तरफ सरकार दलहनी फसलों की सरकारी खरीद शुरू कर दी है, दूसरी तरफ मोकामा के मसूर को बचाने का कोई पहल नहीं हो रहा है। यहां 2 टन प्रति हेक्टेयर के औसत से लगभग 1 लाख 60 हजार टन मसूर का उत्पादन होता है।
मोकामा टाल से जल निकासी के लिए एक हजार करोड़ योजना
इस तरह इस साल कुल लगभग 400-500 करोड़ नुकसान की संभावना इस टाल क्षेत्र की होगी जो एक राष्ट्रीय क्षति है। मोकामा टाल की दशा सुधारने के लिए केन्द्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह के प्रयास से करीब हजार करोड़ की योजना चल रही है जिसमें जल का ठहराव एवं निकासी मुख्य काम है। इस टाल से जल निकासी का एक ही मार्ग है हरोहर नदी। एक या दो रास्ते और बनाए जाए तो जल निकासी और तेज हो जाएगा। इस रास्ते के विकल्प के लिए पूर्व में हमारे साथ की किसानों ने चिह्नित स्थान पर सुझाव दिए गए थे और मांग भी की गई थी। एक स्थान हाथिदह स्टेशन के पास है,वहां टाल और गंगा के बीच की दूरी मात्र 2 कि मी है। दूसरा स्थान औंटा हाल्ट के पास है,यहां भी टाल और गंगा के बीच की दूरी 2-3 कि मी है।इन दोनों जगहों पर पाईप लाईन के द्वारा टाल और गंगा को जोड़कर पंपिंग से तेजी से पानी निकाला जा सकता है।इस योजना की लागत टाल के एक साल के नुकसान 500 करोड़ से कम ही होगा।



















































































