कृषि विभाग ने 30 से अधिक सेवानिवृत्त पदाधिकारियों का पेंशन अटकाया
- किसी को सेवानिवृत्त के एक दिन पहले तो किसी को एक महीने बाद छोटे-छोटे आरोप लगाकर रोका गया पेंशन
- पेंशन नहीं मिलने के कारण आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं पदाधिकारी
सविता। पटना
कृषि विभाग 30 से अधिक सेवानिवृत्त पदाधिकारियों का पेंशन अटका दिया है।विभाग न तो इन कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई कर रहा है और न तो इनका पेंशन और सेवांत लाभ दे रहा है। इसके कारण सेवानिवृत्त कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति खराब हो रही है। वह कर्ज लेकर अपना खर्च उठा रहे हें। परेशान होकर एक दर्जन से अधिक कृषि पदाधिकारियों ने कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया है। पदाधिकारियों का कहना है कि सेवानिवृत्ति के ठीक पहले निंदनीय पत्र जारी कर या कोई रिपोर्ट नहीं देने का आरोप लगाकर पेंशन रोक दिया गया है। जबकि कई कृषि पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप होते हुए भी उन्हें सिर्फ चेतावनी देते हुए आरोपमुक्त कर दिया गया। पटना जिला कृषि कार्यालय के कृषि पदाधिकारी विकास कुमार फरवरी 2025 में सेवानिवृत्त हुए हैं। इनका भी पेंशन 10 महीने से रोक कर रखा है। इनपर सेवानिवृत्त के एक दिन बाद निदनीय प्रस्ताव और ट्रेनिंग नहीं कराने का आरोप लगाकर सेवानिवृत्ति के सारे लाभ रोक दिए गए हैं। इसको लेकर विकास कुमार कृषि विभाग से लेकर मुख्यमंत्री तक पत्र दे चुके हैं। अशोक कुमार कृषि विभाग में उपनिदेशक पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उन पर भी विभागीय कामों में लापरवाही का आरोप था। नियम के तहत आरोप के बाद सुनवाई की पूरी प्रक्रिया हो चुकी है। इसके बावजूद सेवानिवृत्ति का लाभ रोक दिया गया है। वैशाली से सेवानिवृत्त हुए कृषि पदाधिकारी का पेंशन सिर्फ एक रिपोर्ट नहीं देने के आरोप में बिना किसी कारण बताओ नोटिस दिए रोक दिया गया है। जबकि कृषि निदेशक ने आरोप से मुक्त करने का आदेश भी दे दिया। इसके बावजूद इनका पेंशन रोक दिया है। सेवानिवृत्त हो चुके पदाधिकारियों का कहना है कि वे अभी स्वस्थ हैं और कोई रोजगार करना चाहते हैं, लेकिन विभाग के गलत फैसले का खामियाजा भुगत रहे हैं।
वर्जन:
पेंशन क्यों रोका गया है। इसकी जांच की जा रही है। जल्द ही इस मामले पर फैसला लिया जाएगा।
रामकृपाल यादव, कृषि मंत्री
बिहार में सेवानिवृत्ति के नियम और लाभ स्पष्ट, जानिए कब और क्या मिलता है
पटना। बिहार सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लिए सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) से जुड़े नियमों को स्पष्ट रूप से लागू किया है। तय आयु पूरी होने पर कर्मचारियों को सेवा से मुक्त किया जाता है और इसके साथ उन्हें पेंशन, ग्रेच्युटी सहित कई वित्तीय लाभ दिए जाते हैं। वहीं, सामान्य वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी वृद्धजन पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
सेवानिवृत्ति की आयु और पात्रता
बिहार सरकार के अधिकांश कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 58 या 60 वर्ष निर्धारित है, जो सेवा श्रेणी और नियमों पर निर्भर करती है। पेंशन का लाभ पाने के लिए आमतौर पर कम से कम 25 वर्ष की योग्य सेवा आवश्यक होती है। निर्धारित आयु या सेवा अवधि पूरी होने पर कर्मचारी सुपरएनुएशन के आधार पर सेवानिवृत्त किए जाते हैं।
पेंशन और ग्रेच्युटी का लाभ
सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों को नियमित पेंशन दी जाती है, जिसकी गणना अंतिम वेतन और सेवा अवधि के आधार पर होती है। इसके अलावा, कर्मचारियों को ग्रेच्युटी के रूप में एकमुश्त राशि भी मिलती है। विशेष परिस्थितियों में चिकित्सकीय कारणों से सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी पेंशन का प्रावधान है।
नोशनल इंक्रीमेंट का लाभ
राज्य सरकार के निर्णय के अनुसार, यदि कोई कर्मचारी 30 जून या 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त होता है, तो उसे एक अतिरिक्त वेतनवृद्धि (नोशनल इंक्रीमेंट) का लाभ पेंशन गणना में दिया जाता है, जिससे पेंशन राशि बढ़ जाती है।
संविदा पर पुनर्नियोजन की संभावना कुछ विभागों, बोर्डों और निगमों में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को आवश्यकता के अनुसार संविदा पर पुनः नियुक्ति का अवसर भी मिलता है। ऐसे मामलों में आयु सीमा नियमों के अनुसार निर्धारित की जाती है।
सामान्य वरिष्ठ नागरिकों के लिए वृद्धजन पेंशन जो नागरिक सरकारी सेवा में नहीं रहे हैं, उनके लिए राज्य सरकार मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना चला रही है। इसके तहत 60 से 79 वर्ष आयु के लाभुकों को प्रतिमाह पेंशन, 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के नागरिकों को अधिक राशि प्रदान की जाती है।यह पेंशन सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में भेजी जाती है।



















































































