आयुष्मान कार्डधारी बुजुर्गों को इलाज कराने में टूट रही हिम्मत
25-25 दिनों से ऑपरेशन के इंतजार में हैं आयुष्मान कार्डधारी मरीज
सविता। पटना
राजधानी के लोक जयप्रकाश नारायण हड्डी रोग अस्पताल में आयुष्मान कार्डधारी बुजुर्ग मरीजों को न समय में ऑपरेशन हो रहा है और सही इलाज हो रहा है। नि:शुल्क इलाज और गरीबी के कारण हाथ-पैर और कमर की हड्डी के ऑपरेशन के लिए एक-एक महीने का इंतजार करना पड़ रहा है। एलएनजेपी में आयुष्मान कार्डधारी 50 मरीज भर्ती है। इन मरीजों को ऑपरेशन के लिए लम्बा इंतजार और दर्द दे रहा है। हद यह है कि टूटे हुए पैर का बैलेंस बनाने के लिए अस्पताल में ईंट का सहारा लिया जा रहा है। एलएनजेपी अस्पताल में 158 बेड है। इसमें अधिकांश बेड पर आयुष्मान के मरीज भर्ती है। मरीजों का कहना है कि आयुष्मान कार्डधारी मरीज अपना कार्ड कैंसिल कराकर पैसा देकर इलाज करा रहे हैं। हमने एलएनजेपी अस्पताल में आयुष्मान कार्डधारी मरीजों के इलाज की पड़ताल की है।
रॉड निकालने के लिए 15 दिन से अस्पताल में भर्ती है रीता देवी
दानापुर की 65 वर्षीय रीता देवी सिर्फ हाथ में लगे रॉड को निकालने के लिए 15 दिनों से अस्पताल में भर्ती है। तीन से चार दिन पर पानी चढ़ाते हैं और डॉक्टर कहते हैं कि आज रॉड निकल जाएगा, लेकिन रॉड नहीं निकल रहा है। रीता देवी का कहना है कि रॉड के कारण अब हाथ उठाना मुश्किल हो गया है। डेढ़ साल पहले हाथ टूट गया था। डॉक्टर ने हाथ में रॉड लगा दिया। अब रॉड निकालने का समय आया तो अस्पताल में भर्ती करा लिया है और सिर्फ तारीख पर तारीख दे रहे हैं।
पैर में लगे रॉड को निकालने के लिए सात दिनों से पढ़ाई छूट रही
मसौढ़ी से आई चौथी कक्षा की छात्रा के पैर में भी रॉड लगा है। वह भी 7 दिनों से अस्पताल में भर्ती है। लेकिन रॉड नहीं निकल रहा है। छात्रा ने बताया कि अस्पताल में भर्ती रहने के कारण उसकी पढ़ाई छूट रही है। उसके पिता अर्जुन कुमार बताते हैं कि वह पंजाब में काम करते हैं, बेटी के इलाज के लिए काम छोड़कर बैठे हैं।
ऑपरेशन नहीं हुआ तो आयुष्मान कार्ड कैंसिल कराकर 14 हजार रुपए देकर कराया इलाज
बेऊर की रहने वाली मीना देवी का कमर टूट गया है। वह दस दिनों से जयप्रकाश नारायण हड्डी रोग अस्पताल में भर्ती है। उनके पास आयुष्मान कार्ड भी था, डॉक्टर ऑपरेशन के लिए टाल रहे थे, अंत में हारकर वह अपना आयुष्मान कार्ड कैंसिल कराया और उसी अस्पताल में 14 हजार रुपए देकर ऑपरेशन कराया है। गया से आए मोहम्मद जैद बताते हैं कि उनकी कमर की हड्डी टूटी हुई है। 13 दिनों से अस्पताल में भर्ती है। ए निगेटिव खून नहीं मिलने से डॉक्टर ऑपरेशन नहीं कर रहे हैं। मुमताज अली बताती भी 14 दिन से भर्ती हैं उन्हें डॉक्टरों ने कहा है कि आयुष्मान का फंड नहीं आया है, इसलिए ऑपरेशन होने में समय लगेगा। अनीसाबाद की 70 वर्षीय सुशीला देवी बताती है कि 10 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती है। बाथरूम में गिर जाने से पैर टूट गया है। बहुत दिक्कत में है। आयुष्मान कार्ड बना है, लेकिन ऑपरेशन नहीं हो रहा है। पिछली बार पहला पैर टूटा था। उस समय आयुष्मान कार्ड नहीं था तो 12 दिन में ही ऑपरेशन हो गया था, इस साल दर्द में छटपटा रहे हैं।
ट्रैक्शन का सही तरीका क्या है
ट्रैक्शन एक चिकित्सा प्रक्रिया है, जो टूटी हुई हड्डियों या विस्थापित जोड़ों को ठीक करने के लिए उपयोग की जाती है। यह प्रक्रिया हड्डियों को धीरे-धीरे खींचकर, उन्हें उनकी सही स्थिति में लाने और स्थिर करने के लिए होती है।
ट्रैक्शन का सही तरीका चिकित्सा पेशेवर द्वारा निर्धारित किया जाता है, और यह मरीज की स्थिति और आवश्यकताओं पर निर्भर करता है. ट्रैक्शन उपचार के दौरान, मरीज की स्थिति की निगरानी करना और किसी भी जटिलता के लिए तुरंत चिकित्सा सहायता प्राप्त करना महत्वपूर्ण है.
वर्जन
एलएनजेपी अस्पताल में 15 चिकित्सक है। हर दिन दो-तीन ऑपरेशन होता है। 158 बेड पर हड्डी रोग का इलाज हो रहा है। हर दिन 20-25 मरीज आ रहे हैं। पांच से छह मरीज डिस्चार्ज हो रहे हैं। तीन चार ओटी चलता है। छह- आठ प्रत्येक दिन ऑपरेशन होता है। आने वाले मरीजों को पहले ऑपरेशन करना जरूरी होता है। अगर रॉड नहीं निकलता है तो उन्हें इंतजार करना होगा।डॉ सुभाष चंद्रा, सुप्रीटेंडेंट, लोकनायक जय प्रकाश नारायण हड्डी रोग अस्पताल




















































































