महिलाओं को सुरक्षित माहौल देने के लिए सुनसान रास्तों, पुल, गलियों की सोशल ऑडिट कर रही जीविका दीदियां
एक साल में सौ जीविका दीदियों ने 200 जगहों की सेफ्टी ऑडिट कर बनाया है सुरक्षित
जीविका अधिकार केन्द्र से जुड़ी दीदियां महिलाओं और लड़कियों को हिंसा से बचाने के लिए कर रही हैं सेफ्टी ऑडिट
पटना
खुद की पहचान बनानी है तो घर से बाहर निकलना जरूरी है। लेकिन कई लड़कियां और महिलाएं रास्ते से ही घर लौट जाती है। क्योंकि रास्तें से अधिक घूरती नजरें और फब्तियां उन्हें आगे बढ़ने नहीं देता है। ऐसे ही महिलाओं के लिए जीविका दीदियां सेफ्टी ऑडिट कर रही हैं। दीदी अधिकार केन्द्र से जुड़ी जीविका दीदियां महिलाओं पर होने वाले हिंसा से बचाने के लिए यह सेफ्टी ऑडिट करती हैं। पिछले एक साल में 200 जगहों की सेफ्टी ऑडिट किया गया है। 100 महिलाएं मिलकर यह काम कर रही हैं।
दस जिलों में जीविका दीदियां कर रही हैं सेफ्टी ऑडिट
पटना, वैशाली, नालंदा, नवादा, बक्सर, रोहतास, मधुबनी, सुपौल, दरभंगा और मुजफ्फरपुर के 73 प्रखंड की जीविका दीदियां सेफ्टी ऑडिट का काम करती हैं।
गांव का मानचित्र बनाकर असुरक्षित जगहों को करती हैं चिन्हित
अधिकार केन्द्र से जुड़ी जीविका दीदियां सेफ्टी ऑडिट करने से पहले जमीन स्तर पर काम करती हैं। वह उन रास्तों, पुल-पुलिया, गलिया और सुनसान मकान की तलाश करती हैं, जहां से गुजरने पर लड़कियां और महिलाएं असुरक्षित महसूस करती है। इसके लिए गांव का मानचित्र बनाती हैं। मानचित्र पर उन जगहों को लाल निशान लगाती हैं, जिसे गांव की लड़कियां और महिलाएं असुरक्षित बताती हैं। इसके बाद उस जगह पर जाती हैं। स्थान पर जाकर और देखती हैं कि क्या-क्या परेशानियां हैं। दिन में सुबह, दोपहर और शाम के समय उस जगह के बारे में पूरी जानकारी लेती हैं। जहां से गुजरने पर लड़कियां असहज महसूस करती हैं।
स्ट्रीट लाइट लगाने से लेकर सड़क बनवाने और लफंगों को हटाने के लिए चलाती हैं अभियान
सोशल ऑडिट के दौरान जीविका दीदियां सुनसान और अंधेरे रास्तों पर स्ट्रीट लगवाने और सड़क बनवाने के लिए पंचायत में आवेदन करती है। वैसे पुल-पुलिया जहां लफंगे फब्तियां कसते हैं। उसके लिए गांव की सभी महिलाओं और लड़कियों के हस्ताक्षर के साथ थाने में आवेदन करती हैं। यही हर महीने गांव में होने वाले ग्राम सभा की बैठक में असुरक्षित और अंधेरे रास्तों पर प्रश्न उठाती है। बैठक में मुखिया से लेकर थानाध्यक्ष भी शामिल होते हैं। ग्राम सभा में सारी समस्याओं पर चर्चा होने के बाद जगह को महिलाओं और लड़कियों के लिए सुरक्षित बनाया जाता है। पुलिस की पेट्रोलिंग बढ़ती है



















































































