शहद के औषधीए गुणों ने 68 वर्षीय गिरिराज किशोर डालमिया को सबसे बड़ा व्यापारी बनाया
- आये थे पटना में नौकरी की तलाश में, बन गये मधु के सबसे बड़े व्यापारी
- गिरिराज किशोर डालमिया, मधु प्रोसेसिंग में कमाया नाम
- एक साल में 24 टन शहद का कर रहे हैं प्रोसेसिंग और पैकेजिंग

उम्र 68 साल और काम करने के लिए जुनून देखते बनती है। उत्साह और उमंग से लवरेज व्यक्ति का नाम है गिरिराज किशोर डालमिया। वह कहते हैं कि नियमित व्यायाम और नित दिन शहद के इस्तेमाल से वह स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। शहद के प्रति इस प्रेम के कारण वह आज बिहार के जाने माने शहद के व्यापारी के रूप में पहचान बनायी है। वह बताते हैं शहद को अमृत माना गया है। शहद सिर्फ आपका मुहं नहीं करता, बल्कि यह एक औषधी है। बिहार की लीची की शहद पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। शहद की इसी मिठास ने गिरिराज किशोर डालमिया को पटना खिंच लाया। उनका मानना है कि सफलता तभी मिलती है जब आपको अपने सपनों से प्यार हो। आज से 26 साल पहले काम की तलाश में आये डालमिया जी पटना आए थे। डाकबंगला रोड में बालाजी हनी के नाम से प्रसिद्ध श्री डालमिया हर महीने तीन टन मधु का प्रोसेसिंग और पैकेजिंग करते हैं। इसके साथ सैकड़ों लोगों को रोजगार देने का काम कर रहे हैं। उनका मानना है सफलता हर क्षेत्र में है जरूरत है मेहनत और सच्ची लगन की।
इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ी
मूलत: मुंगेर के रहने वाले गिरिराज किशोर डालमिया ने बैंग्लोर में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। 1997 में काम की तलाश में पटना आये थे। बहुत दिनों तक इधर-उधर भटके, लेकिन काम नहीं मिला। इधर-उधर काम के लिए भटकने के दौरान उन्हें पता चला कि राज्य में मधु का उत्पादन बहुत होता है। लेकिन प्रोसेसिंग और पैकेजिंग की सुविधा नहीं होने के कारण सारा मधु पंजाब और हरियाणा जा रहा है। यहां के किसानों को मधु की सही कीमत नहीं मिल पा रहा है। डालमिया बताते हैं इस समय उनकी इंजीनियरिंग की पढ़ाई काम आ गई। वे कहते हैं इंजीनियरिंग में पढ़ाई के दौरान बताया गया था कि जहां कच्चा माल मिलता है। वहां दाम इफेक्टिव होता है। एक तो ट्रांसपोर्टेशन का पैसा बचता है मधु प्रोसेसिंग का पैसा भी बचता है।
परिवार वालों की सोच को गलत साबित किया
जब मधु का प्रोसेसिंग और पैकेजिंग का काम शुरू किया तो परिवार वालों ने कहा इंजीनियरिंग होकर क्या कर रहा है। क्या कमायेगा और क्या परिवार को चलाएगा। परिवारों वालों का बहुत दबाव था। फिर भी मैंने काम नहीं छोड़ा। पहले तो एक महीने में सिर्फ एक हजार रुपये का मधु बेच पाता था। लेकिन जैसे-जैसे लोगों का विश्वास जागा। मेरा बिजनेस चल पड़ा। मेरी सफलता उस दिन पता चली जब वैद्यनाथ के सीईओ ने मुझे फोन करके बोला कि एक सर्वे में आप डाबर के बाद सबसे बड़े मधु के व्यापारी बन गये हैं। आज मेरे बच्चे सभी अच्छे जगहों पर हैं।


















































































