#Health

46 साल की उम्र में कैंसर को हराकर महिलाओं और बच्चों को तकनीक से जोड़ रही मीनम संजीव कुमार

  • शादी के 15 साल तक बच्चा नहीं होने पर लोग देते थे ताने, लेकिन पति ने कभी साथ नहीं छोड़ा

  • पति के भरोसे और साथ की वजह से कैंसर जैसी बीमारी को हराया और आज महिला सशक्तीकरण के लिए कर रही हैं काम

शादी के बाद 15 सालों तक बच्चा का नहीं होना, महिला के लिए अभिशाप से कम नहीं होता। समाज की सवाल करती आंखें महिलाओं को अंदर ही अंदर मारने लगती है। बच्चे के लिए मेडिकल ट्रीटमेंट का सहारा लिया। बहुत मुश्किलों से एक बेटी का जन्म हुआ। अत्याधिक दवाओं और मेडिकल ट्रीटमेंट का दुष्प्रभाव भी मेरे शरीर पर पड़ा और मैं कैंसर से पीड़ित हो गई। बेटी की परवरिश और कैंसर से जूझते हुए मैँने जिन्दगी जीना कभी नहीं छोड़ा। मेरी हिम्मत के आगे बीमारी हार मान गई। आज मैं स्वस्थ हूं और 500 से अधिक महिलाओं को तकनीक से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के क्षेत्र में काम कर रही हूं। यह कहना है मीनम संजीव कुमार का। 46 वर्षीय मीनम संजीव कुमार पटना के ग्रामीण क्षेत्र परसा में डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने के क्षेत्र में काम कर रही हैं। वह बच्चों और महिलाओं को डिजिटल साक्षर कर रही हैं।

वह बताती हैं कि अब 400 महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण दे चुकी हैं। खासकर शिक्षिकाओं को प्रशिक्षित करती हैं। वह शिक्षिकाओं को बताती हैं कि ऑनलाइन मोड में बच्चों को कैसे पढ़ाए कि वह अच्छे से समझ सके। इस संबंध में मॉड्यूल बनाकर शिक्षिकाओं को प्रशिक्षित कर रही हैं।

 

पिता बालेश्वर लाल दास ने बचपन से समाज सेवा के लिए प्रेरित किया

मीनम बताती हैं कि वह पूर्णिया की रहने वाली हैं। उनके पिता ने बचपन से ही समाज सेवा के लिए प्रेरित किया। यही कारण रहा कि जब भी मौका मिलता, वह समाज सेवा के लिए आगे आती हैं। जब उन्हें कैंसर हुआ तो इस काम पर भरोसा और बढ़ गया। उनके पति संजीव कुमार नौकरी करते हैं। बेटी जब थोड़ी बड़ी हुई तो समाज सेवा के क्षेत्र में काम करना शुरू किया। कोराेना काल ने इस काम को और गति दे दी।

 

पति का साथ सबसे बड़ी ताकत

वह बताती हैं कि उनके पति संजीव कुमार एक सॉफ्टवेयर कंपनी में कार्यरत है। उनके पति उनका बैकबोन हैं। दुनिया चाहे जैसी मेरे साथ व्यवहार करे, लेकिन पति हर हाल में मेरे साथ खड़े रहे। यही उनकी ताकत है। कोरोना काल में पति की सहायता से लोगों को ऑनलाइन पढ़ाई कराना शुरू किया। विदेशों में रहने वाले बच्चों को ऑनलाइन मेटेरियल उपलब्ध कराया और प्रशिक्षित किया। इसके बाद उन्हीं छात्रों से परसा के बच्चों को ऑनलाइन पढ़वाया।

 

ग्रामीण महिलाओं से कैंडल बनवाया और फिर बाजार में बेचा

मीनम ने महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए कैंडल बनाने का प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण देने के बाद महिलाओं से ही रंग-बिरंगे कैंडल बनवाया और फिर दीवाली पर मेले में बेचा। इन पैसों से महिलाओं को काफी सहायता मिली।