कृषि विभाग की लापरवाही से लेखपाल की जान गई, नौ महीने से मानदेय नहीं मिलने से थी मानसिक तनाव में थी
- पैसे नहीं रहने की वजह से किसी दूसरे अस्पातल में भी नहीं ले जा पाए।
- छपरा आत्मा कार्यालय में कार्यरत लेखापाल रीना की मौत
रोहित भारती। पटना
कृषि विभाग की लापरवाही के कारण लेखापाल रीना कुमारी की मौत हो गई। 32 वर्षीय रीना कुमारी ने पटना के नर्सिंग होम में अंतिम सांस ली। नौ महीने से मानदेय नहीं मिलने की वजह से वह मानसिक तनाव में थी। घर में वह अकेली कमाने वाली सदस्य थी। पति राम कुमार मांझी बीमार रहते हैं, इसलिए घर का खर्च रीना ही उठाती थी। रीना के दो बच्चों को स्कूल की फीस नहीं जमा करने के कारण निकाल दिया गया है। पति राम कुमार मांझी ने पत्नी की मौत का जिम्मेवार कृषि विभाग के पदाधिकारियों को बताया है। कहा कि मानदेय मिलने से पिछले दो महीने से मानसिक तनाव था। अक्सर में सिर में दर्द रहता था। फिर भी दवा खाकर ड्यूटी कर रही थी। स्थिति यह हो गई कि घर चलाने के लिए लोन लेना पड़ा, लेकिन बच्चों की फीस नहीं जमा कर पा रहे थे। इसके कारण समस्या और बढ़ गई। पांच दिन पहले सिर में अचानक तेज दर्द हुआ और आनन–फानन में पटना के निजी अस्पताल में भर्ती कराए। अस्पताल ले जाते ही आईसीयू में भर्ती कराया गया। लेकिन उनकी पत्नी आईसीयू से वापस नहीं आई। पैसे नहीं रहने की वजह से किसी दूसरे अस्पातल में भी नहीं ले जा पाए। हालांकि साथी कर्मचारियों ने चंदा करके पैसा भी दिया, लेकिन बच नहीं पाई और मंगलवार को मौत हो गई। आत्मा के राज्य योजना के तहत बहाल लेखापाल, पियून और लिपिक में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है। पांच जनवरी को 600 से अधिक कर्मचारियों ने मीठापुर स्थिति कृषि भवन में प्रदर्शन भी किया था। इसमें निजी अस्पताल में भर्ती रीना की दयनीय स्थिति के बारे में बताया गया था। इसके बावजूद कोई भी पदाधिकारी रीना की सुध नहीं ली और न आर्थिक मदद के लिए आगे आए। पैसे की तंगी की वजह से एक दिन बाद उसकी माैत हो गई। बता दें कि आत्मा राज्य योजना के तहत बिना योजना पास कराए बामेती की ओर से नौ महीने तक कर्मचारियों से काम कराया गया। इसके कारण वित्त विभाग ने मानदेय की राशि नहीं जारी की। कृषि निदेशक सौरभ सुमन ने कहा कि प्रावधान के अनुसार हर संभव मदद की जाएगी।
चार साल का गगन मां को ढूंढ़ रहा
चार साल के गगन को यह भी पता नहीं है कि उसकी मां अब नहीं रही। शाम होेते ही मां को ढूंढ़ने लगता है। पिता से पूछता है कि मां ड्यूटी से कब आएगी। लाचार पिता सिर्फ बहाना बनाकर रह जाता है। राम कुमार मांझी बताते हैं कि साल 2012 में उनकी शादी हुई थी। शादी के बाद पत्नी को अच्छी पढ़ाई कराई। वह उस समय जॉब करते थे। लेकिन कुछ दिन बाद वह बीमार रहने लगे और डॉक्टरों ने भारी काम करने से मना कर दिया। इस दौरान 2020 में रीना को लेखापाल के रूप में संविदा पर कृषि विभाग में नौकरी मिल गई। बच्चों की भी देखरेख करनी थी, इसलिए पत्नी ही काम करने लगी।


























































































