धिक्कार सहने वाले कुष्ठ रोगी दूसरों की कदम

जिन्दगी ऐसी है कि कोई भीख भी देना नहीं चाहता। लोग अछूत मानते हैं। हमें देखकर रास्ता बदल लेते हैं, लेकिन जिन्दगी कहां रुकती है। इस ठहरी हुई जिन्दगी को हमने दूसरों के लिए चप्पलें बनाकर रफ्तार देने की कोशिश कर रहे हैं।

महिलाओं में बढ़ रहा एचआईवी का खतरा, बढ़ती उम्र के साथ अधिक सतर्क रहने की जरूरत

महीने में 50-60 महिलाएं एचआईवी और हेपेटाइटिस से ग्रसित मिल रही हैं। एचआईवी उस समय पकड़ में आती है जब महिलाओं को प्रसव में परेशानी आनी शुरू होती है।

दीघा दूधिया मालदह आम को संरक्षित किया जाए, तभी जीआई टैग मिलेगा

दीघा दूधिया मालदह आम को जीआई टैग दिलाने की पहल हो रही है। लेकिन दीघा में अब मात्र 100 पेड़ ही दूधिया मालदह की रह गया है। ये सारे पेड़ भी अब जैसे-तैसे बचे हैं। शहरीकरण में इन पेड़ों की भी बली चढ़ाने की कोशिश जा रही है। इस साल इन पेड़ों अच्छे मंजर आए हैं, लेकिन कृषि विभाग की ओर से दीघा दूधिया मालदह को संरक्षित नहीं किया जा रहा है। यह कहना है दीघा के सुधीर कुमार का। 45 वर्षीय सुधीर कुमार बताते हैं कि आज उनके परदादा द्वारा लगाए गए दीघा दूधिया मालदह आम खत्म हो रहा है और वह कुछ नहीं कर सकते हैं।

दलित बस्ती में जलायी शिक्षा की लौ

सुधा वर्गीज-आज के जमाने में जब आदमी खुद की दुनियां मे सिमट कर रह गया। वहीं दूसरे प्रदेश से आयी एक महिला ने दलित बस्ती की लड़कियों की शिक्षा के लिए न केवल लड़ी बल्कि समाज में मानवता की परिभाषा से लोगों को फिर से सोचने को मजबूर कर दिया। 1987 ई में केरल मूल की सुधा वर्गीज बिहार के लोगों के बारे जानने के लिए पटना के दानापुर आयी। यहां आकर देखा कि मुसहर जाति के बच्चे जो स्कूल जाने की उम्र में तितर,बटेर मार रहे हैं। दिनभर एक-इधर बेकार कामों में लगे हैं। यह सब देख देखकर वह बहुत दुखी हुई। उन्होंने तय किया की अशिक्षा की इस खाई को सिर्फ शिक्षा ही मिटा सकती है।

आयुष्मान कार्डधारी बुजुर्गों को इलाज कराने में टूट रही हिम्मत

25-25 दिनों से ऑपरेशन के इंतजार में हैं आयुष्मान कार्डधारी मरीज सविता। पटना राजधानी के लोक जयप्रकाश नारायण हड्डी रोग अस्पताल में आयुष्मान कार्डधारी बुजुर्ग मरीजों को न समय में ऑपरेशन हो रहा है और सही इलाज हो रहा है। नि:शुल्क इलाज और गरीबी के कारण हाथ-पैर और कमर की हड्डी के ऑपरेशन के लिए […]

कठपुतली नृत्य से शिक्षा एवं सामाजिक जागरूकता करते सुनील

कठपुतली जब जल जीवन हरियाली की बात करें तो शहरी लोगों के साथ साथ ग्रामीण लोग भी पर्यावरण जैसे गंभीर विषय को सरल व सहजतापूर्वक समझ जाते हैं।गीत संगीत कहानियों के माध्यम से कठपुतली सामाजिक विज्ञान,समाज सुधार अभियान को लेकर शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से देश समाज में जागरूक करने वाले सरला श्रीवास सामाजिक सांस्कृतिक शोध संस्थान के संयोजक लोक कलाकार सुनील कुमार मुजफ्फरपुर जिले के मुसहरी प्रखंड मालीघाट निवासी कठपुतली कला का प्रशिक्षण देते है।

मुंगेर की महिलाएं बकरी के दूध से बना रही साबुन और विदेशों में कर रही मार्केटिंग

मुंगेर के 255 गांवों की 33 हजार से अधिक महिलाएं बकरी पालन कर अपनी किस्मत बदल रही हैं। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की महिलाएं बकरी का मीट, दूध के साथ बीट की खाद बनाती ही हैं, लेकिन इससे भी अधिक पैसा बकरी के दूध से साबुन और ब्यूटी प्रोडक्ट बनाकर कमा रही है। महिलाएं हर महीने का 20-25 हजार रुपए तक कमा लेती हैं। अब बकरी के दूध से बने साबुन की विदेशों में मार्केटिंग कर रही है।

सभ्य समाज के लिए सरकार और समाज बुजुर्गों के लिए एक ऐसी जगह बनानी होगी जहां वह अकेलापन महसूस न करे : डॉ सत्यजीत सिंह

हमें बदलाव के लिए तैयार होना होगा। बुजुर्गों को अपने लगाव के लिए बच्चों का कॅरियर नहीं मारना चाहिए। हममें से बहुत सारे लोग हैं जो बिजनेस डॉक्टर वकील और इंजीनियर्स हैं। हमें इस चीज की तैयारी करनी होगी कि हम आगे बढ़ेंगे बच्चे हमारे बाहर जाएंगे तो हम कैसे रहेंगे और उसके लिए संस्था होनी चाहिए। उनके बच्चे बाहर चले गए हैं वह कैसे एक साथ रहेंगे, जिससे उन्हें अकेलापन न महसूस हो। यह अन्याय होगा कि बच्चे माता-पिता के लिए कॅरियर को छोड़ दें, पढ़ाई छोड़ दें और बुजुर्गों की सेवा में लग जाए।