सुधा वर्गीज-आज के जमाने में जब आदमी खुद की दुनियां मे सिमट कर रह गया। वहीं दूसरे प्रदेश से आयी एक महिला ने दलित बस्ती की लड़कियों की शिक्षा के लिए न केवल लड़ी बल्कि समाज में मानवता की परिभाषा से लोगों को फिर से सोचने को मजबूर कर दिया। 1987 ई में केरल मूल की सुधा वर्गीज बिहार के लोगों के बारे जानने के लिए पटना के दानापुर आयी। यहां आकर देखा कि मुसहर जाति के बच्चे जो स्कूल जाने की उम्र में तितर,बटेर मार रहे हैं। दिनभर एक-इधर बेकार कामों में लगे हैं। यह सब देख देखकर वह बहुत दुखी हुई। उन्होंने तय किया की अशिक्षा की इस खाई को सिर्फ शिक्षा ही मिटा सकती है।