खेतों में मजदूरी करने वाली 7महिलाएं बनी फॉर्मर प्रोड्यूसर कंपनियों की मालकिन
- पूर्णिया, सहरसा, कटिहार, किशनगंज, सहरसा, सुपौल और खगड़िया में बनी महिलाओं ने लगाई मखाना प्रोसेसिंग यूनिट
- महिला मखाना उत्पादक कंपनियों की ओर से प्रतिवर्ष 14 सौ क्विंटल सबौर मखाना बीज-1 का उत्पादन किया जा रहा है।
- फॉर्मर प्रॉड्यूसर कम्पनियों में महिलाओं की भागीदारी से गुणवत्ता से लेकर कार्यशैली में आया सुधार
सविता। पटना
राज्य की सात मखाना उत्पादक कंपनियों की मालकिन महिलाएं बन गई है। सभी सात कंपनियों का नाम महिला स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर रखा गया है। इन मखाना उत्पादक कंपनियों का काम मखाना उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और देश-विदेश में निर्यात करना है। सबसे खास बात यह है कि मखाना उत्पादक कंपनियों में 100 प्रतिशत महिलाएं ही कार्यरत है। पूर्णिया, सहरसा, कटिहार, किशनगंज, सहरसा, सुपौल और सहरसा में महिला उत्पादक कंपनी बनाई गई है। इन कंपनियों को साल 2023-25 के बीच बनाया है। इसकी स्थापना के पीछे मकसद यह था कि मखाना उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण में सबसे अधिक योगदान महिलाओं का रहता है। काम करने के बावजूद इनके काम को अहमियत नहीं मिलती थी। महिलाओं में नेतृत्व क्षमता को बढ़ाने और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए उनके नाम से कंपनी बनाने का निर्णय लिया गया।
70 महिलाओं को मखाना उत्पादन, प्रसंस्करण से लेकर पैकेजिंग का प्रशिक्षण दिया गया
मखाना वैज्ञानिक डॉ अनिल बताते हैं कि कंपनी बनाने की शुरुआत साल 2019-20 में हुई थी। उसी साल राज्य सरकार ने मखाना विकास योजना लाई थी। इसके तहत क्लस्टर बनाकर मखाना का क्षेत्र विस्तार करना था। बहुत सारे किसानों ने मखाना उत्पादन में भाग्य आजमाने लगे तो अचानक बीजों की मांग बहुत बढ़ गई। बीज की मांग को पूरा करने के लिए मखाना उत्पादन में लगी महिलाओं को भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय पूर्णिया के द्वारा 70 महिलाओं को मखाना बीज उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण और मार्केटिंग के लिए प्रशिक्षित किया गया। इन 70 महिलाओं प्रशिक्षण लेने के बाद कंपनी स्थापित की। प्रशिक्षण लेने वाली 50 प्रतिशत महिलाओं ने कॅरियर के रूप में मखाना उत्पादन और प्रसंस्करण को चुना है। इन सातों मखाना उत्पादक कंपनियों की ओर से प्रतिवर्ष 14 सौ क्विंटल सबौर मखाना बीज-1 का उत्पादन किया जा रहा है। महाश्वेता देवी कृषक उत्पादक कंपनी लिमिटेड की मालकिन 25 वर्षीय साधना कुमारी बताती हैं कि उन्हें मखाना के बीज का अच्छा मूल्य मिल रहा है। वह बॉटनी से स्नातक है। पहले पति पर निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन अब उसकी अपनी पहचान है।
वर्जन:
मखाना उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण में महिलाओं की भूमिका सबसे अधिक रहती है, इसलिए बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने महिलाओं को ही प्रशिक्षित कर कंपनी का मालकिन का काम किया है। अभी बीज उत्पादन का काम किया जा रहा है। जुलाई-अगस्त में नई फसल आते ही प्रसंस्करण का काम भी महिलाओं द्वारा ही किया जाएगा।
डॉ डीआर सिंह, कुलपति, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर
सात मखाना उत्पादक कंपनियों के नाम
महाश्वेता देवी कृषक उत्पादक कंपनी लिमिटेड, किशनगंज, प्रीतिलता कृषक उत्पादक कंपनी, अररिया, उदा देवी कृषि उत्पादक कंपनी लिमिटेड, कटिहार, झानोफुलो कृषक उत्पाक कंपनी लिमिटेड, पूर्णिया, उमाबाई कृषक उत्पादक कंपनी लिमिटेड, किशनपुर, रामादेवी कृषक उत्पादक कंपनी लिमिटेड, मधेपुरा और रामप्यारी कृषक उत्पादक कंपनी लिमिटेड, सहरसा



















































































