पति बीमार थे, लोगों ने कहा अकेली औरत है क्या करेगी, एक साथ गाय, बकरी, हंस और मछली पालन कर बन गई लखपति
- मेनू से प्रेरित होकर आस-पास के 15-20 लोगों ने बकरी पालन और मत्स्यपालन को बनाया कॅरियर
12 हंस 30 गाय, 20 बकरी ,कड़कनाथ मुर्गा,18 कट्ठा में तीन तालाब में रेहू और कतला मछलीपालन करती है और 2 बीघा में पट्टा पर लेकर खेती करती है
बेटा आईआईटी खड़गपुर से आईआईटी किया और बेटी फैशन डिजाइनर बनाया
सविता। पटना
पटना के परसा की रहने वाली 45 वर्षीय मेनू कुमारी एक ही जगह पर गाय, बकरी, मुर्गा, हंस के साथ तीन तालाबों में मछली पालन कर रही है। समेकित कृषि के इस मॉडल को देखने के लिए पूरे बिहार से अधिकारी, प्रशिक्षु पदाधिकारी और छात्र आते हैं। मेनू बताती हैं कि वह साल 2019 में बकरी पालन और मत्स्यपालन से शुरू की प्रेरित होकर पिछले तीन साल में परसा में 15-20 से अधिक लोगों ने बकरी से लेकर मछली पालन को कॅरियर के रूप में अपनाया है। खुद के दम पर मुकाम बनाने के लिए वेटनरी कॉलेज की ओर से सम्मानित किया जा चुका है। वह बताती है कि उन्हें बचपन से पशु पक्षियों से प्रेम था। यही कारण रहा जब पति राकेश कुमार मानसिक रूप से बीमार हुए तो उन्हें इस पेशे को कॅरियर के रूप में चुनी। आज वह खुद के साथ सात लोगों को सीधे तौर पर रोजगार दे रही है। इसके अलावे कई लोगों को रोजगार से जोड़ा है। मेनू के पास 12 हंस 30 गाय, 20 बकरी ,कड़कनाथ मुर्गा,18 कट्ठा में तीन तालाब में रेहू और कतला मछलीपालन करती है और 2 बीघा में पट्टा पर लेकर खेती करती है। सबसे खास बात यह है कि खेती के लिए खाद भी मवेशियों से ही मिल जाती है। जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ अरूण बताते हैं कि मेनू कुमारी की सफलता की कहानी हर वेटनरी के छात्र-छात्राओं को बताया जाता है।
एक गाय से शुरू हुआ कारोबार लाखों रुपए की कमाई तक पहुंचा
मेनू बताती है कि 20 साल पहले उनके पति मानसिक रूप से बीमार हो गए। घर में कोई नहीं था, जो कमाकर बच्चों की परवरिश कर सके। लोग देखते सिर्फ तरस खाते थे, कहते थे अकेली औरत है क्या करेगी। सास-ससूर के देहांत होने के बाद पति की स्थिति और खराब हो गई, लेकिन घर में एक गाय थी। वह गौ पालन और पट्टा पर जमीन लेकर खेती करने लगी। हिम्मत बढ़ी तो रिश्तेदार भी साथ देने लगे। वह बताती हैं कि वह इंटर तक पढ़ी हैं। मवेशी पालन से संबंधित जानकारी के लिए वेटनरी कॉलेज आया-जाया करती थी। इसी दौरान उन्हें बकरी पालन के बारे में पता चला, उसने 20 बकरी लेकर पालन करने लगी। बकरी में मुनाफा हुआ तो कड़कनाथ मुर्गा भी ले आई। बकरी से लेकर मुर्गा सब स्थानीय स्तर पर ही बिकने लगे। साल 2019 में मछली पालन की शुरुआत की, लेकिन साल 2020 में करोना के कारण लॉकडाउन लग गया, सारी पूंजी डूबने के कगार पर आ गई। फिर भी हिम्मत नहीं हारी और बाजार में बेचने के लिए निकल पड़ी। धीरे-धीरे बाजार जोर पकड़ा तो सब ठीक होने लगा। अभी 18 कट्ठा में तीन तालाबों में रोहू और कतला मछलियों का पालन कर रही है। एक बार में 50 किलो मछली का उत्पादन करती है। एक गाय से शुरू हुआ सफर आज लाखों रुपए की कमाई तक पहुंच गया है। मेनू को दो बच्चे हैं। बेटा आईआईटी खड़गपुर से आईआईटी किया और बेटी फैशन डिजाइन की पढ़ाई कर रही है।



















































































