प्रकृति, प्रणायाम और सूक्ष्म आसन से स्वस्थ जीवन का भरपूर लुत्फ उठाए बुजुर्ग
चालीस की उम्र पार करते ही स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं सामने आने लगती है और 60 पार होते के प्रतिरोधक क्षमता घटने लगती है और हडि्डयां जवाब देने लगती है। वृद्धावस्था में भी स्वस्थ रहने के लिए योग का सहारा लेना चाहिए। उम्र के इस पड़ाव पर हडि्डयों से संबंधित समस्या सबसे आम होती है। घुटने, कमर और अन्य जगहों पर दर्द से लोगों का जीना हराम हो जाता है। इससे बचने के लिए बुजुर्गों को सुक्ष्म अभ्यास करना चाहिए। क्योंकि भारी भरकम आसन से दर्द और बढ़ जाता है। योगाचार्य उदित कुमार बताते हैं कि बुजुर्गों को सुक्ष्म आसन करके स्वस्थ रहने का तरीका ढूंढ़ लेना चाहिए। इसके साथ परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बिताकर खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए। क्योंकि वृद्धावस्था एकाकीपन और मायूसी घेरने लगती है। इसलिए परिवार का साथ बहुत जरूरी है। अगर बच्चे साथ में नहीं रहते हैं तो अपनी हॉबी का काम कीजिए और खुद को व्यस्त रखे। भोजन सात्विक करे। इसके साथ जितना हो सके प्रकृति से जुड़ने का प्रयास करे। हरियाली आपको हमेशा ऊर्जावान बनाता है। यह हमे मिटकर फिर से उगने की प्रेरणा देती है।
योगगुरु उदित बुजुर्गों के लिए कुछ योग बता रहे हैं। पादा ऊंगली नमन, पादा ऊंगली घ्रुनन, जानू पलक आकर्षण, जानू घ्रुनन, अर्द्ध तितली, पूर्ण तितली, ग्रीवा संचालन के लिए स्कंदचक्र अभ्यास, केहुनी नमन, मुस्तिका बंधन और अनुलोम-विलोम जैसे प्रणायाम जरूर करे।
यह जरूर करे।
- सोने और भोजन करने का समय निश्चित करे
- सात्विक भोजन करे
- प्रकृति के साथ रहे
- परिवार के साथ अधिक से अधिक समय गुजारे
- अनुलोम-विलोम प्रणायाम करे



















































































