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बिहार में कृषि वैज्ञानिकों को जबरदस्ती 65 के बदले 62साल में कर दिया रिटायर्ड

  • कृषि वैज्ञानिक कार्यालय आए तो उन्हें पता चला कि वे सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
  • आठ कृषि वैज्ञानिकों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया
  • ऑफिस में ही कृषि वैज्ञानिकों को पता चला कि वे सेवानिवृत्त हो चुके हैं

सविता। पटना

बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर ने आठ कृषि वैज्ञानिकों को 65 साल के बदले जबरदस्ती 62 साल में सेवानिवृत्त कर दिया गया। हद यह है कि न तो सेवानिवृत्ति की शर्तों को लागू किया गया और न समय से पहले कृषि वैज्ञानिकों को इसकी सूचना पहले दी गई। इसमें एक कृषि वैज्ञानिक को 31 दिसंबर 2024 को और 7 कृषि वैज्ञानिकों को 31 जनवरी 2025 की शाम पांच बजे अचानक ईमेल से पता चला कि वे सेवानिवृत्त हो गए हैं।

सेवानिवृत्ति के बाद मिली सेवानिवृत्त होने की जानकारी
सबसे पहले दिसंबर में ही भोजपुर केवीके के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ प्रवीण कुमार द्विवेदी को सेवानिवृत्ति करने से संबंधित पत्र थमा दिया गया। वह 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त होने वाले थे और विश्वविद्यालय ने 11 दिसंबर को पत्र दिया कि आपका कार्यकाल 31 दिसंबर को समाप्त हो रहा है। जबकि सेवानिवृत्ति के नियमों के तहत कम से कम दो महीने पहले सेवानिवृत्ति की सूचना देनी पड़ती है। इसके अलावे सात सात कृषि वैज्ञानिक 31 जनवरी को शाम पांच ईमेल से सूचना दी गई, वे सेवानिवृत्त हो गए हैं। यानी कार्यालय में ही थे उन्हें पता चला कि वे सेवानिवृत्त हो चुके हैं। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर सेवानिवृत्ति की उम्र सीमा घटाई गई तो किस तारीख से मान्य होगा, इसका जिक्र होना चाहिए था। जैसे नई पेंशन स्कीम लागू की गई तो 2004 के बाद सरकारी सेवा में आने वाले कर्मचारियों को इसका लाभ देने की घोषणा हुई, जबकि बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने ऐसा नहीं किया। डॉ प्रवीण कुमार द्विवेदी बताते हैं कि पिछले साल कृषि वैज्ञानिकों के वार्षिक सम्मेलन में वीसी ने सिर्फ मौखिक कहा था कि आप लोगों की सेवानिवृत्ति की उम्र सीमा 62 कर दी जाएगी। लेकिन उसी सम्मेलन में आए आईसीएआर के उपमहानिदेशक डॉ यूएस गौतम ने कहा कि आप बिहार कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक हैं, इसलिए आपलोगों पर विश्वविद्यालय के नियम लागू होंगे। उन्होंने इसलिए ऐसा कहा था कि क्योंकि आईसीएआर में 62 साल सेवानिवृत्ति की उम्र सीमा कर दी गई थी। इससे पहले बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर ने खुद झारखंड सरकार को पत्र लिखकर कहा था कि उनके कृषि वैज्ञानिकों की सेवानिवृत्ति की उम्र सीमा 65 साल है।

बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर अन्तर्गत संचालित सभी कृषि विज्ञान केन्द्र भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली द्वारा वित्त पोषित संस्था है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली के पत्रांक F.No. A.Extn.4/18/2019-A.E.III (e-52000) दिनांक 20.08.2024 द्वारा प्राप्त दिशा-निर्देश के आलोक में कृषि विज्ञान केन्द्र में कार्यरत सभी कर्मी को गैर-शैक्षणिक वर्ग में रखा गया है। एतद्क्रम में कृषि विभाग, बिहार सरकार का पत्र आईसीएआर के उक्त दिशा-निर्देश के अनुसार कार्रवाई करने के लिए प्राप्त है। विश्वविद्यालय परिनियम में निहित प्रावधान के आलोक में विश्वविद्यालय एवं इसके अंगीभूत इकाईयों में कार्यरत गैर-शैक्षणिक कर्मियों का सेवानिवृत्ति की आयु 62 वर्ष निर्धारित है।

डॉ एम हक, कुलसचिव बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर

इन्हें 31 जनवरी 2025 को किया गया सेवानिवृत्त:
डॉ शंभू राय, केवीके, लखीसराय, वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान
डॉ एसबी सिंह, केवीके, गया, वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान
डॉ कुमारी शारदा, केवीके, कटिहार, वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान
डॉ बिपुल कुमार मंडल, केवीके, खगड़िया,
डॉ केपी सिंह, केवीके, कटिहार, उद्यान वैज्ञानिक
डॉ जावेद इदरिस, केवीके, कटिहार, पौधा संरक्षण के वैज्ञानिक
डॉ डीएन पांडेय, केवीके, शेखपुरा, वैज्ञानिक

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के फैसले को भी हाईकोर्ट ने रोक लगाई है

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (BAU) के वैज्ञानिकों को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। विश्वविद्यालय द्वारा वैज्ञानिकों की रिटायरमेंट उम्र 65 साल से घटाकर 60 साल करने के फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। हाईकोर्ट ने इस मामले में बीएयू और ICAR (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) से जवाब तलब किया है। अगली सुनवाई 22 जून 2025 को होगी।

सेवानिवृत्ति के बाद, व्यक्ति के पास आमतौर पर कई विकल्प होते हैं, जैसे: 

  • पेंशन या अन्य सेवानिवृत्ति लाभ प्राप्त करना
  • निवेश करना और आय उत्पन्न करना
  • सामाजिक गतिविधियों में भाग लेना
  • अपने शौक और रुचियों का पीछा करना
  • अपने परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताना

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