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बुजुर्गों के लिए विशेष ओपीडी और जेरिएट्रिक वार्ड की है जरूरत

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  • राज्य में इंदिरा गाँधी राष्ट्रिय वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत 1 लाख 49 हजार पेंशनधारी है

  • बिहार राज्य स्वास्थ्य समिति ने पत्र जारी कर सभी अस्पतालों में जेरिएट्रिक वार्ड खोलने को कहा है

साल 2050 तक देश की कुल जनसंख्या का 20-22 प्रतिशत बुजुर्गों की संख्या होगी। 60 से अधिक आयु वाले बुजुर्गों के स्वास्थ्य एवं सामुदायिक स्तर पर देखभाल के लिए समुचित एवं साथ प्रयास की जरूरत होगी। इसको देखते हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र से लेकर जिला अस्पतालों में बुजुर्गों के विशेष स्वास्थ्य सुविधाएं देने की पहल हो रही है। लेकिन राज्य में बुजुर्गों के लिए विशेष देखभाल तो दूर अलग से ओपीडी की भी व्यवस्था नहीं है। जबकि बिहार राज्य स्वास्थ्य समिति ने पत्र जारी कर सभी अस्पतालों में जेरिएट्रिक वार्ड खोलने को कहा है ताकि बुजुर्गों को इलाज के लिए घंटों खड़ा रहना न पड़े|

साल 2015 में पीएमसीएच में जेरिएट्रिक वार्ड खुला, लगा रहता है ताला

साल 2015 में पीएमसीएच में बुजुर्गों के लिए जेरियाट्रिक वार्ड खुला था। यही नहीं पीएमसीएच में बुजुर्गों के लिए विशेष ओपीडी की सुविधा दी जा रही थी। पिछले तीन साल से जेरिएट्रिक वार्ड पर ताला लगा रहा है। हालांकि वार्ड के बाहर जेरिएट्रिक्स विभाग, वरीय नागरिकों के लिए करके एक बोर्ड लगा है। लेकिन बुजुर्गों को कोई सेवा नहीं मिल रही है। इस पर पीएमसीएच अधीक्षक आईएएस ठाकुमर का कहना है कि पीएमसीएच टूटकर नया बन रहा है। अभी कई डिपार्टमेंट तोड़कर बनाने का काम चल रहा है। इसलिए अभी हम कुछ नहीं कर सकते हैं।

बुजुर्गों की व्यथा

राजधानी के मलाही पकड़ी के रहने वाले 70 वर्षीय रमेश प्रसाद सिंह बताते हैं कि पीएमसीएच में बुजुर्गों के लिए जेरिएट्रिक वार्ड बना है। इसके बारे में किसी को पता भी नहीं है। मैं 2016 में भर्ती हुआ था। दोबारा 2018 में गया तो बंद था। इलाज के अभाव में कई बुजुर्ग घर में ही रह जाते हैं। उनके लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं है।

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