बुजुर्ग स्थिर हैं, टारगेट भी बुजुर्ग, लेकिन वोटर लिस्ट में शामिल होने की मुश्किलें रहेंगी
- वोटर पुनरीक्षण में अधिक से अधिक बुजुर्गो को शामिल करना सबसे बड़ा मकसद
- राज्य में लगभग डेढ़ करोड़ है बुजुर्गों की संख्या
- इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के लाभार्थी 35 लाख 59 हजार 667 है।
- मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना के तहत 49 लाख 56 हजार 103 बुजुर्गों को पेंशन मिलता है।
सविता। पटना
बुजुर्ग स्थिर हैं। वे मर रहे हैं। उनका नाम वोटर लिस्ट से काटना है और युवाओं को जोड़ना है। लेकिन निर्वाचन आयोग 12 प्रकार के दस्तावेज मांग रहे हैं, उनमें बुजुर्गों के पास कितने हैं। यह सोचना होगा। राज्य में डेढ़ करोड़ के लगभग में बुजुर्गों की जनसंख्या पहुंच गई है। बिहार सरकार के आंकड़ों के अनुसार इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के लाभार्थी 35 लाख 59 हजार 667 है। वहीं मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना के तहत 49 लाख 56 हजार 103 बुजुर्गों को पेंशन मिलता है। जिनको पेंशन मिलता है, उनका वोटर पुनरीक्षण भी मुश्किल होगा, लेकिन बीएलओ का मुख्य लक्ष्य बुजुर्गों को ही जोड़ना है। क्योंकि बुजुर्ग जल्द अपना मंतव्य नहीं बदलते। बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहे शांत रक्षित बताते हैं जितने प्रकार के दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, उतने दस्तावेज तो बुजुर्गों के पास भी नहीं होगा। खासकर महिलाएं जिस पार्टी को उनका बेटा वोट दे रहा है, वह भी उसको भी वोट देते हैं। बस उनको कोई मतदान केन्द्र तक पहुंचा दे। यह सारा काम बिहार चुनाव को लेकर हो रहा है। बिहार में नवम्बर में चुनाव होने हैं। चुनाव को लेकर निर्वाचन आयोग ने वोटर पुनरीक्षण का काम शुरू किया है। वोटर पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष से लेकर आम आदमी भी विरोध में उतर गए हैं। 9 जुलाई को विपक्ष ने इसके खिलाफ भारत बंद रखा। भारत बंद को सफल बनाने के लिए राहुल गांधी खुद पटना पहुंचे और वोटर पुनरीक्षण को वोटबंदी करार दिया। हालांकि इस दौरान ज्यादा बवाल नहीं हुआ। विपक्ष का आरोप है कि वोटर पुनरीक्षण कर एनडीए किसी तरह से बिहार की सत्ता में आना चाहती है। इससे गरीब,मुस्लिम और प्रवासी मजदूरों को वोट देने के अधिकार से वंचित करना चाहती है। इन सब आरोपों के बीच बुजुर्ग कहां है इस वोटर पुनरीक्षण में। हम इस सवाल को ढूंढ़ने की कोशिश कर रहे हैं।
यह भी समस्या है
वोटर पुनरीक्षण में 12 प्रकार के दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। जिन बुजुर्गों के पास अवासीय नहीं है। वह अपना घर छोड़ बेटे और बेटियों के पास रह रहे हैं। उनके लिए दिक्कत है कि उनका नाम वोटर लिस्ट में कैसे जुड़ेगा।
50 प्रतिशत बुजुर्ग मैट्रिक पास ही नहीं है। जो मैट्रिक पास हैं, उनका सर्टिफिकेट सुरक्षित भी है कि नहीं, यह देखना होगा।
90 प्रतिशत बुजुर्गों के पास पासपोर्ट नहीं है। अगर वह दिल्ली, मुम्बई और बैंगलुरु में बेटे और बेटियों के साथ रह रहे हैं तो अपना नाम वोटर लिस्ट में कैसे दर्ज कराएंगे।
वृद्धा पेंशन में मृत बुजुर्गों का पता लगाने के लिए होगा जीवन प्रमाणीकरण
सरकार की ओर से वृद्धापेंशन की राशि 400 रुपए से बढ़ाकर 1100 रुपए कर दिए गए हैं। समाज कल्याण विभाग ने वृद्धा पेंशन में नए बुजुर्गों को जोड़ने के लिए बुजुर्गों का जीवन प्रमाणीकरण करने का निर्णय लिया है। समाज कल्याण विभाग की सचिव बंदना प्रेयषी ने बताया कि साल 2022 में सभी लाभार्थियों का वेरिफिकेशन हुआ था। इसमें लाखों बुजुर्गों की मौत हो चुकी होगी, लेकिन उनके खाते में अब भी वृद्धा पेंशन की राशि जा रही है। इससे जिन बुजुर्गों की उम्र 60 साल हो गई है, उन्हें हम जोड़ नहीं पा रहे हैं। क्योंकि एक लक्ष्य के हिसाब से पेंशन की राशि दी जाती है। जीवन प्रमाणीकरण होने से सही लाभार्थियों की जानकारी मिल जाएगी। पटना जिले में 1लाख 92 हजार 308 बुजुर्गों को वृद्धापेंशन मिलता है। इसमें 11 हजार 421 बुजुर्गों का भौतिक सत्यापन हुआ है। लेकिन जीवन प्रमाणीकरण में 619 बुजुर्ग मृत मिले है। 36 बुजुर्गों का कोई पता नहीं चल पा रहा है।
वृद्धा पेंशन के लिए ई-केवाईसी फरवरी से बंद है
वृद्धा पेंशन के लिए ई-केवाईसी कराना अनिवार्य है। लेकिन फरवरी से ही ई-केवाईसी बंद है। इससे दो लाख से अधिक बुजुर्गो का पेंशन नहीं मिल पा रहा है। समाज कल्याण विभाग की ओर से आधार से लिंकेज करा दिया गया है। समाज कल्याण विभाग की सचिव बंदना प्रेयषी ने बताया कि एनआईसी और बेल्ट्रॉन के साथ मिलकर ई-केवाईसी के साथ मिलकर बैठक करेंगे, इसके बाद ई-केवाईसी की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी।



















































































