भाई-बहनों के अटूट प्रेम की कहानी : भाई की रक्षा करने वाले से ही शादी करने की रखी शर्त
- छोटे भाई की हत्या के बाद बड़े भाई की रक्षा के लिए बहनों ने नहीं की शादी
- राजधानी के दुजरा की रहने वाले भाई-बहनों की है यह कहानी
सविता। पटना
भाई-बहनों के अटूट प्रेम की कहानी तो सुनते ही हैं, लेकिन दो बहनों द्वारा भाई की रक्षा करने की शर्त पर ही शादी की रजामंदी देने की बात पहली बार बताने जा रहे हैं। बहनों द्वारा भाई का रक्षा कवच बनने की यह कहानी है राजधानी पटना के दुजरा की। रागिनी, संगीता दो बहनें हैं और इनके भाई का नाम है राजकिशोर। राजकिशोर दोनों बहनों से बड़े हैं। एक भाई की हत्या साल 2004 में कर दी गई थी। छोटे भाई बृजकिशोर की मौत के बाद पिता लल्लू लाल चौधरी और मां प्रभावति देवी भी गम में गुजर गई। बहनों की शादी हो जाए, इस इंतजार में भाई ने शादी नहीं की तो बहनाें ने भाई की रक्षा कौन करेगा, इस चिंता में शादी नहीं की। राजकिशोर की उम्र 53 साल है। रागिनी 51 और संगीता 48 साल की है। रागिनी प्रशासनिक सुधार मिशन में कम्प्यूटर ऑपरेटर है। संगीता सरकारी स्कूल में शिक्षिका है और भाई राजकिशोर लीगल एडवाइजर हैं।
करोड़ों रुपए की जमीन जायदाद ही इनके दु:खों का कारण
करोड़पति होना हर कोई चाहता है लेकिन इनके परिवार के लिए यही संपत्ति दु:खों का कारण है। इनके पिता करोड़ों रुपए की संपत्ति छोड़कर गए हैं। घर में भाई के सिवा कोई नहीं है। उनके जमीन जायदाद पर भूमाफियाओं की नजर रहती है। रागिनी बताती हैं कि जमीन और संपत्ति हड़पने के लिए कई बार उनके भाई को जान से मारने की कोशिश की गई। यही नहीं पानी में जहर भी मिलाकर पिला दिया गया, लेकिन दोनों बहनों ने मिलकर भाई को मौत के मुहं से खिंच लाया। राजकिशोर बताते हैं कि उनकी बहनें उनकी जान हैं। पुरखों की जमीन जायदाद की रक्षा करना उनका धर्म है। बहनें उनके लिए हमेशा ढाल बनकर सामने रहती हैं।
भाई उनके लिए भगवान है, भगवान की रक्षा ही सबसे बड़ा कर्म
रागिनी बताती हैं कि एक भाई को मरते देखा है, दूसरे को चोट भी लगती है तो सह नहीं पाती हैं। वह बताती हैं हम बहनों की जिम्मेवारी भाई है। भाई उनके लिए भगवान है और उनकी रक्षा करना ही सबसे बड़ा काम है। राजकिशोर बताते हैं कि वह पांच भाई-बहन थे। छोटा भाई बृजकिशोर सरकारी स्कूल का शिक्षक था। हमारा एक खुशहाल परिवार था। लेकिन भूमाफिया जमीन जबरदस्ती पिता से लिखवाना चाहते था। पिता ने इनकार कर दिया था, इसके बाद अपराधियों ने भाई की हत्या कर दी और 27 नवम्बर 2004 हमारे परिवार के लिए काला दिन साबित हुआ। भाई की हत्या के बाद मां छत से गिर गई। मां का कमर टूट गया। पिता पर जानलेवा हमला किया गया। पिता भी बिस्तर पर आ गए। 16 साल तक माता-पिता की सेवा, कोर्ट कचहरी के चक्कर और गम में बीत गया। इस दौरान न वह शादी कर पाए और न बहनों की कर पाये। नाते रिश्तेदार भी कन्नी काटने लगे तो अब तीनों एक दूसरे के सहारा बन गए।



















































































