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वृद्धावस्था में होने वाली बीमारियों के कारणों को जानना जरूरी

सविता। पटना

वृद्धावस्था सिर्फ आपको शारीरिक रूप से कमजोर नहीं बनाता है, बल्कि आर्थिक और सामाजिक स्तर पर भी शिथिल कर देता है। लोग खुद को बेकार समझने लगते हैं। मानसिक स्वास्थ्य पर सबसे अधिक असर पड़ता है। सामाजिक सुरक्षा मिलना चुनौती हो जाती है। विदेशों में 60 की उम्र पार करने के बाद लोगों को सामाजिक ही आर्थिक सुरक्षा की पूरी गारंटी सरकारी योजनाओं में सम्मलित रहता है। बिहार ही नहीं देश के किसी भी हिस्से में यह व्यवस्था नहीं है। यूके में जेरियाट्रिक्स डॉक्टर अनिल कुमार बताते हैं कि वृद्धावस्था में लोग बातें भूलने लगते हैं। इस वजह से घर से निकलने में भी डरते हैं। कई बुजुर्ग घर से बाहर नहीं निकलते हैं कि वह कहीं गुम न हो जाए। उनके हाथ-पैरों में थरथराहट होने लगता है। ठीक से खाना, पानी पीने में दिक्कत होने लगती है। 99 प्रतिशत बुजुर्गों की आंखों की रोशनी कम हो जाती है। स्वास्थ्य संबंधित ये समस्याएं उन्हें सामाजिक स्तर पर कमजोर बनाने लगता है। इसलिए अब जरूरत आ गई है कि इनके स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के लिए योजनाएं बने। यूके में जेरियाट्रिक विशेषज्ञ डॉ अनिल कुमार ने कहा कि यूके में 65 साल के लोगों की सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य सुविधाओं की पूरी सुविधा दी जा रही है। खासकर वृद्धावस्था की पूरी देखभाल की जाती है। बिहार में जेरियाट्रिक पर काम करने की जरूरत है। एलएनजेपी के निदेशक डॉ सुभाष चंद्रा ने कहा कि उनके अस्पताल में हड्‌डी रोग से संबंधित अधिकांश मरीज वृद्ध ही होते हैं। लोग उन्हें भर्ती करा देते हैं, लेकिन हड्‌डी से संबंधित समस्याएं क्यों होती है, इसके बारे में कोई नहीं सोचता है। उनकी हड्‌डी क्यों टूटी है और कहां टूटी है, यह भी गौर करने की जरूरत है। मौके पर अस्पताल के हड्‌डी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद रहे।
वृद्धावस्था में कुछ विशिष्ट बीमारियाँ और स्वास्थ्य समस्याएं आम होती हैं, जिनमें हृदय रोग, डिमेंशिया, मधुमेह, ऑस्टियोपोरोसिस, और कैंसर शामिल हैं. इसके अलावा, उम्र बढ़ने के साथ, जोड़ों में दर्द, थकान, और मांसपेशियों की कमजोरी जैसी सामान्य समस्याएं भी हो सकती हैं.

वृद्धावस्था में आम बीमारियाँ:

1. हृदय रोग:
हृदय रोग, जैसे कि कोरोनरी धमनी रोग, हृदय विफलता और अतालता, वृद्धावस्था में सबसे आम बीमारियों में से हैं.

2. डिमेंशिया:
डिमेंशिया, डिमेंशिया और अल्जाइमर रोग सहित, वृद्ध लोगों में याददाश्त और सोचने की क्षमता को प्रभावित करते हैं.

3. मधुमेह:
मधुमेह, विशेष रूप से टाइप 2 मधुमेह, वृद्ध लोगों में आम है, जो रक्त में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित करने में कठिनाई का कारण बनता है.

4. ऑस्टियोपोरोसिस:
ऑस्टियोपोरोसिस एक ऐसी स्थिति है जो हड्डियों को कमजोर और भंगुर बना देती है, जिससे फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है.

5. कैंसर:
कैंसर वृद्धावस्था में होने वाले आम रोगों में से एक है, जिसमें विभिन्न प्रकार के कैंसर शामिल हो सकते हैं.

6. जोड़ों में दर्द:
उम्र बढ़ने के साथ, जोड़ों में दर्द और कठोरता हो सकती है, जो ऑस्टियोआर्थराइटिस या अन्य संयुक्त रोगों के कारण हो सकती है.

7. थकान:
वृद्धावस्था में थकान और कम ऊर्जा एक आम समस्या है, जो विभिन्न कारणों से हो सकती है, जैसे कि हृदय रोग, पुरानी बीमारी, या डिमेंशिया.

8. मांसपेशियों की कमजोरी:
उम्र बढ़ने के साथ, मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, जिससे गिरने और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है.

9. कब्ज:
वृद्ध लोगों में कब्ज एक आम समस्या है, जो आंतों की गति में कमी के कारण होती है.

10. उल्टी या मतली:
वृद्ध लोगों में उल्टी या मतली विभिन्न कारणों से हो सकती है, जैसे कि दवा के साइड इफेक्ट्स, संक्रमण, या गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएँ.

अन्य स्वास्थ्य समस्याएं:

उच्च रक्तचाप:
वृद्धावस्था में उच्च रक्तचाप आम है, जो हृदय रोग और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है.

मोतियाबिंद:
मोतियाबिंद, जो आंखों में लेंस की धुंधलापन है, भी वृद्धावस्था में आम है, जिससे दृष्टि कम हो सकती है.

गठिया:
गठिया, जो जोड़ों में सूजन और दर्द है, भी वृद्ध लोगों में आम है, जो उनकी गतिशीलता को सीमित कर सकता है.

अवसाद:
वृद्ध लोगों में अवसाद एक आम समस्या है, जो जीवन की गुणवत्ता को कम कर सकता है.

चिंता:
वृद्ध लोगों में चिंता भी आम है, जो उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है.

वृद्धावस्था में स्वास्थ्य समस्याओं का प्रबंधन:
वृद्धावस्था में स्वास्थ्य समस्याओं का प्रबंधन करने के लिए, एक स्वस्थ जीवनशैली और नियमित चिकित्सा देखभाल महत्वपूर्ण हैं। इसमें शामिल हैं:

स्वस्थ आहार:
संतुलित आहार का सेवन करें जो फलों, सब्जियों, और साबुत अनाज से भरपूर हो.

नियमित व्यायाम:
नियमित व्यायाम करने से मांसपेशियों की ताकत और हृदय स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है.

पर्याप्त नींद:
पर्याप्त नींद लेने से ऊर्जा के स्तर में सुधार हो सकता है और अवसाद के जोखिम को कम किया जा सकता है.

धूम्रपान और शराब से बचें:
धूम्रपान और शराब से बचना हृदय रोग और कैंसर के जोखिम को कम कर सकता है.

नियमित चिकित्सा जांच:
नियमित चिकित्सा जांच करने से स्वास्थ्य समस्याओं का जल्द पता लगाया जा सकता है और उनका प्रभावी ढंग से इलाज किया जा सकता है.

वृद्धावस्था में होने वाली बीमारियों और स्वास्थ्य समस्याओं का प्रबंधन करने के लिए, यह महत्वपूर्ण है कि आप अपने स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से सलाह लें और एक स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखें।

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