सभ्य समाज के लिए सरकार और समाज बुजुर्गों के लिए एक ऐसी जगह बनानी होगी जहां वह अकेलापन महसूस न करे : डॉ सत्यजीत सिंह

पैसा होना, सड़कें बनना और हवाई जहाज होना, सिविलाइज्ड सोसाइटी का हिस्सा नहीं बल्कि बुजुर्गों और गरीबों के लिए कोई आता है तो हम कहेंगे हम विकसित देश में रहते हैं

हमें बदलाव के लिए तैयार होना होगा। बुजुर्गों को अपने लगाव के लिए बच्चों का कॅरियर नहीं मारना चाहिए। हममें से बहुत सारे लोग हैं जो बिजनेस डॉक्टर वकील और इंजीनियर्स हैं। हमें इस चीज की तैयारी करनी होगी कि हम आगे बढ़ेंगे बच्चे हमारे बाहर जाएंगे तो हम कैसे रहेंगे और उसके लिए संस्था होनी चाहिए। उनके बच्चे बाहर चले गए हैं वह कैसे एक साथ रहेंगे, जिससे उन्हें अकेलापन न महसूस हो। यह अन्याय होगा कि बच्चे माता-पिता के लिए कॅरियर को छोड़ दें, पढ़ाई छोड़ दें और बुजुर्गों की सेवा में लग जाए।

बच्चे को भी दु:ख होता है। समाज में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए। जिसमें बुजुर्गों की देखभाल अच्छे से हो, उनके स्वास्थ्य की देखभाल हो और उन्हें अकेलापन महसूस न हो और बच्चों को गिल्ट महसूस न हो। इसके लिए सरकार या निजी संस्थान ओल्ड होम बनाए, जहां बुजुर्ग रह सके। वह बातचीत करेंगे, भजन करेंगे। बहुत सारे सीनियर हैं जिनके पास पैसा है, लेकिन उनकी दवा, सब्जी खरीदकर लाने वाला कोई नहीं है। उनको अस्पताल ले जाने वाला कोई नहीं है। हमने इंग्लैंड में देखा है। जहां सरकारी एजेंसी अस्तपालों में भर्ती बुजुर्गों को देखभाल करते हैं। अस्पताल से घर पहुंचाने से लेकर खाना बनाकर देते हैं। वैन से शॉपिंग करा देते हैं। पैसा होना, सड़कें बनना, बड़े हवाई जहाज बनना और बिल्डिंग बनना सभ्य समाज नहीं कहलाता है, हर व्यक्ति चाहे बुजुर्ग हो या गरीब हो, उसके देखभाल के लिए सरकार और सिविल सोसाइटी कुछ करती है, तभी हम कहेंगे हम विकसित और सभ्य समाज में रहते हैं।

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