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47 वर्षीय विनय कुमार ने बैंक की नौकरी छोड़ शुरू की पपीते की खेती, एक बार में होता है 200 टन उतपादन

कृषि वैज्ञानिकों ने कहा था पटना में नहीं हो सकती है पपीते की खेती  मिट्‌टी उपचार कर दानापुर के विनय महीने के कमाने रहे लाखों रुपए

सविता। पटना

आरा के रहने वाले 47 वर्षीय विनय कुमार ने वैज्ञानिकों के शोध को गलत साबित कर दिखाया है। कृषि वैज्ञानिकों ने कहा था कि पटना की मिट्‌टी में एक खास प्रकार का कीड़ा होता है, जो पपीते की खेती को बर्बाद कर देता है। लेकिन विनय कुमान ने वैज्ञानिकों की सोच को गलत साबित करते हुए 20 बीघे में पपीते की खेती कर लाखों रुपए की आमदनी कर रहे हैं। विनय कुमार ने इस साल से 40 बीघे में पपीते की फसल लगा ली है। वह बताते हैं कि पिछले तीन सालों से 20 बीघे में पपीता लगा रहे हैं। एक बार में 200 टन पपीते का उत्पादन होता है। सबसे अच्छी बात यह है कि सारा पपीता व्यवसायी खुद आकर खरीद लेते हैं।

दस सालों तक बैंक में नौकरी की, पटना आकर खेती से बदली खुद की किस्मत

विनय बताते हैं कि वह दस सालों तक मुम्बई में आईसीआईसी बैंक में सेल्स अधिकारी के रूप में काम किया। लेकिन बिहार से बाहर रहना हमेशा अखड़ता था। उम्र भी बढ़ रही थी। उन्होंने सोचा कि क्यों न बिहार चले, लेकिन क्या करे, इस ऊहापोह में थे। उन्होंने तय कि वह खेती करेंगे। पपीते की खेती के लिए मार्केट रिसर्च किया। रिसर्च के दौरान पता चला कि पटना में सारा पपीता कोलकात्ता और दूसरे प्रदेशों से आता है। उन्होंने पपीते की खेती करनी सोची। कई कृषि वैज्ञानिकों से संपर्क किया। सबने कहा यहां पपीते की खेती संभव नहीं है। उन्होंने तय किया कि मिट्‌टी का उपचार करेंगे। बिहटा के सिकंदरपुर सोन नदी के किनारे का गांव है। उन्होंने मिट्‌टी की जांच की तो वह कीट उनकी मिट्‌टी में नहीं थी। फिर क्या था, उन्होंने मिट्‌टी का उपचार कर पपीता लगा लिया। छह महीने में पपीता तैयार हो गया। उन्होंने दानापुर सब्जी मंडी में बेचा तो बहुत पसंद किया गया।

पपीते की खेती करने का तरीकाः 

  • पपीते की खेती के लिए, अच्छी क्वालिटी के बीजों का इस्तेमाल करें. बीजों को नर्सरी में बोना चाहिए. 

  • बीज बोने से पहले, क्यारी को 10 फ़ीसदी फ़ॉर्मेलडीहाइड के घोल से उपचारित करें. 

  • बीजों को एक सेंटीमीटर गहराई पर और 10 सेंटीमीटर की दूरी पर बोएं. 

  • जब पौधे 8-10 सेंटीमीटर लंबे हो जाएं, तो उन्हें क्यारी से पॉलीथीन बैग में ट्रांसफ़र कर दें. 

  • जब पौधे 15 सेंटीमीटर ऊंचे हो जाएं, तो 0.3 फ़ीसदी फ़ंगसनाशक घोल का छिड़काव करें. 

  • पपीते की खेती के लिए, गहरी और उपजाऊ, सामान्य पीएच मान वाली बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है. 

  • पपीते की खेती के लिए, ज़मीन में जल निकास का होना ज़रूरी है. 

  • पपीते की खेती के लिए, 22 से 26 डिग्री सेल्सियस तापमान उपयुक्त होता है. 

  • पपीते की खेती के लिए, औसत वार्षिक वर्षा 1200-1500 मिलीमीटर पर्याप्त होती है. 

  • पपीते की फसल में लगभग 12-15 महीनों में फल तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं

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