वृद्धावस्था में होने वाली बीमारियों के कारणों को जानना जरूरी

वृद्धावस्था सिर्फ आपको शारीरिक रूप से कमजोर नहीं बनाता है, बल्कि आर्थिक और सामाजिक स्तर पर भी शिथिल कर देता है। लोग खुद को बेकार समझने लगते हैं। मानसिक स्वास्थ्य पर सबसे अधिक असर पड़ता है। सामाजिक सुरक्षा मिलना चुनौती हो जाती है। विदेशों में 60 की उम्र पार करने के बाद लोगों को सामाजिक ही आर्थिक सुरक्षा की पूरी गारंटी सरकारी योजनाओं में सम्मलित रहता है। बिहार ही नहीं देश के किसी भी हिस्से में यह व्यवस्था नहीं है। यूके में जेरियाट्रिक्स डॉक्टर अनिल कुमार बताते हैं कि वृद्धावस्था में लोग बातें भूलने लगते हैं।

दीघा दूधिया मालदह आम को संरक्षित किया जाए, तभी जीआई टैग मिलेगा

दीघा दूधिया मालदह आम को जीआई टैग दिलाने की पहल हो रही है। लेकिन दीघा में अब मात्र 100 पेड़ ही दूधिया मालदह की रह गया है। ये सारे पेड़ भी अब जैसे-तैसे बचे हैं। शहरीकरण में इन पेड़ों की भी बली चढ़ाने की कोशिश जा रही है। इस साल इन पेड़ों अच्छे मंजर आए हैं, लेकिन कृषि विभाग की ओर से दीघा दूधिया मालदह को संरक्षित नहीं किया जा रहा है। यह कहना है दीघा के सुधीर कुमार का। 45 वर्षीय सुधीर कुमार बताते हैं कि आज उनके परदादा द्वारा लगाए गए दीघा दूधिया मालदह आम खत्म हो रहा है और वह कुछ नहीं कर सकते हैं।

दलित बस्ती में जलायी शिक्षा की लौ

सुधा वर्गीज-आज के जमाने में जब आदमी खुद की दुनियां मे सिमट कर रह गया। वहीं दूसरे प्रदेश से आयी एक महिला ने दलित बस्ती की लड़कियों की शिक्षा के लिए न केवल लड़ी बल्कि समाज में मानवता की परिभाषा से लोगों को फिर से सोचने को मजबूर कर दिया। 1987 ई में केरल मूल की सुधा वर्गीज बिहार के लोगों के बारे जानने के लिए पटना के दानापुर आयी। यहां आकर देखा कि मुसहर जाति के बच्चे जो स्कूल जाने की उम्र में तितर,बटेर मार रहे हैं। दिनभर एक-इधर बेकार कामों में लगे हैं। यह सब देख देखकर वह बहुत दुखी हुई। उन्होंने तय किया की अशिक्षा की इस खाई को सिर्फ शिक्षा ही मिटा सकती है।

महिलाओं को सुरक्षित माहौल देने के लिए सुनसान रास्तों, पुल, गलियों की सोशल ऑडिट कर रही जीविका दीदियां

एक साल में सौ जीविका दीदियों ने 200 जगहों की सेफ्टी ऑडिट कर बनाया है सुरक्षित जीविका अधिकार केन्द्र से जुड़ी दीदियां महिलाओं और लड़कियों को हिंसा से बचाने के लिए कर रही हैं सेफ्टी ऑडिट पटना खुद की पहचान बनानी है तो घर से बाहर निकलना जरूरी है। लेकिन कई लड़कियां और महिलाएं रास्ते […]

आयुष्मान कार्डधारी बुजुर्गों को इलाज कराने में टूट रही हिम्मत

25-25 दिनों से ऑपरेशन के इंतजार में हैं आयुष्मान कार्डधारी मरीज सविता। पटना राजधानी के लोक जयप्रकाश नारायण हड्डी रोग अस्पताल में आयुष्मान कार्डधारी बुजुर्ग मरीजों को न समय में ऑपरेशन हो रहा है और सही इलाज हो रहा है। नि:शुल्क इलाज और गरीबी के कारण हाथ-पैर और कमर की हड्डी के ऑपरेशन के लिए […]

कठपुतली नृत्य से शिक्षा एवं सामाजिक जागरूकता करते सुनील

कठपुतली जब जल जीवन हरियाली की बात करें तो शहरी लोगों के साथ साथ ग्रामीण लोग भी पर्यावरण जैसे गंभीर विषय को सरल व सहजतापूर्वक समझ जाते हैं।गीत संगीत कहानियों के माध्यम से कठपुतली सामाजिक विज्ञान,समाज सुधार अभियान को लेकर शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से देश समाज में जागरूक करने वाले सरला श्रीवास सामाजिक सांस्कृतिक शोध संस्थान के संयोजक लोक कलाकार सुनील कुमार मुजफ्फरपुर जिले के मुसहरी प्रखंड मालीघाट निवासी कठपुतली कला का प्रशिक्षण देते है।

दो वक्त की रोजी रोटी की मोहताज 12 महिलाओं ने सिक्की के सामान बनाकर बनी लखपति दीदी

पटना एयरपोर्ट से लेकर दिल्ली हाट में बिकते है सिक्की से बने टोकरी, डलियां, आर्टिफिशल ज्वेलरी और साज सज्जा के सामान जीविका दीदियां कुशग्राम बनाकर देश- विदेश में हुई मशहूर सविता। पटना गरीबी का हाल मत पूछिए, एक दिन खाते थे तो दूसरे दिन उपासे रहना पड़ता था। खेतों में सालों भर काम नहीं मिलता […]

बिहार में ओलंपिक के लिए तैराक तैयार करने में लगे हैं 48 वर्षीय पंकज

राष्ट्रीय स्तर का स्विमिंग पुल का नहीं होना, खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ी परेशानी जब खुद नहीं बन पाए राष्ट्रीय स्तर का तैराक को बेटी को बना दिया तैराक सविता। पटना तैराकी करना मेरा शौक है। बचपन में घर में बिना बताए गंगा नदी में तैरने चला जाता था। घर में पिटाई के डर से […]

मुसलमानों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की लड़ाई लड़ रहे 71 वर्षीय जाहिद अंसारी

गंगा में मछली मारने की आजादी दिलाने वाले जाहिद अंसारी ने गंगा मुक्ति आंदोलन किया सुल्तानगंज से पीरपैंती तक 80 किलोमीटर में पानीदारी कानून लगाकर कर मछुआरों से टैक्स वसूलते थे। सविता। पटना मुसलमानों को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए समाज की मुख्यधारा में आना ही पड़ेगा, बिना मुख्यधारा में आए, हमारा समाज विकसित […]

बड़े बड़प्पनवाले थे छोटे बाबू

छोटे बाबू नहीं रहे। वह विश्व संवाद केन्द्र के संस्थापक थे। बेहद ही शालिन थे और समाज के प्रति समर्पित व्यक्ति थे। छह अक्टूबर को लंबी बीमारी के बाद अंतिम सांसा ली।एक गीत की पंक्ति उनके नाम को चरितार्थ करता है जो खानदानी रईस हैं वो मिजाज रखते हैं नर्म अपना। शायद गीतकार ने छोटे […]

बेटियों को बाल विवाह से बचा स्कूल से जोड़ रही हैं 65 वर्षीय सविता डे

सविता डे, वह नाम है, जिनकी जिन्दगी बेटियों और महिलाओं के सबल करने में लग गई। सविता डे आज 65 साल की है। वह आज भी एक दम साधारण जिन्दगी जीती हैं।रोहतास के तिलौथू में रहकर बेटियों को मानव तस्करी से बचाने के लिए आज भी रात के बारह बजे हो या दो बजे निकल पड़ती हैं उम्र के इस पड़ाव पर भी समाज के प्रति समर्पन और काम करने का जुनून हर किसी को प्रेरित करता है। वह रोहतास की पहाड़ियों पर महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त में लगी हैं।सविता बताती हैं कि बचपन से ही दूसरों की सहायता करना उनकी रुचि थी।

दलितों को भूमि का अधिकार दिलाने की लड़ाई 31 सालों से लड़ रही हैं मंजू डुंगडुंग

समाज सेवा का मतलब समाज के प्रति समर्पण होता है। इस बात का जीता जागता उदारहण हैं मंजू डुंगडुंग।पैरों में हवाई चप्पल,कंधे पर कपड़े का थैला और आंखों में दलितों और वंचितों के साथ हो रहे नाइंसाफी के खिलाफ लड़ाई लड़ने के जज्बे के साथ 52 वर्षीय मंजू झुग्गी-झोपड़ी ही नहीं सुदूर गांवों में काम करती हैं।

बड़ा उद्योग नहीं, हाथों के हुनर से 52वर्षीय मंजू झा बनी सफल उद्यमी

घर में रहकर ठेकुआ, खजुरी, निमकी, अचार, दनौरी, अदौरी के अलावे कई तरह के मिक्चर बनाती हैं सविता।पटना बोरिंग रोड के चिल्ड्रेन पार्क के सामने 52 वर्षीय मंजू झा और 58 वर्षीय आदित्य झा स्टॉल लगाकर ठेकुआ, निमकी, दनौरी, अदौरी, पुआ, बेचते नजर आ जाएंगे। वरीष्ठ नागरिक के रूप में वह अपने देश के विकास […]

47 वर्षीय विनय कुमार ने बैंक की नौकरी छोड़ शुरू की पपीते की खेती, एक बार में होता है 200 टन उतपादन

कृषि वैज्ञानिकों ने कहा था पटना में नहीं हो सकती है पपीते की खेती  मिट्‌टी उपचार कर दानापुर के विनय महीने के कमाने रहे लाखों रुपए सविता। पटना आरा के रहने वाले 47 वर्षीय विनय कुमार ने वैज्ञानिकों के शोध को गलत साबित कर दिखाया है। कृषि वैज्ञानिकों ने कहा था कि पटना की मिट्‌टी […]

60 साल की उम्र में सब्जी बेचकर जिन्दगी जीती इंदू देवी हैं सबके लिए मिसाल

सचिवालय के सामने 40 सालों से सब्जी बेच रही हैं इंदू देवी खुद का एकाउंट खुलवाया है उसमें ही सब्जी का ऑनलाइन पैसा लेती हैं सविता। पटना पटना के सचिवालय के सामने 60 वर्षीय इंदू देवी शान से सब्जी बेचती हैं। क्योंकि उन्होंने खुद को कभी थका-हारा नहीं माना। वह अपने बच्चों पर बोझ नहीं […]

पटना की श्वेता कभी मानसिक तनाव से ग्रसित थी, अब प्राणिक हीलिंग से स्वस्थ होकर दूसरे लोगों के लिए काम करने लगी

बीमार लोग और गर्भवती महिलाओं को सुकून और राहत भरी नींद बहुत जरूरी होती है। हम हीलिंग से ऐसे लोगों को मानसिक शांति देते हैं। इस प्रक्रिया के माध्यम से हम लोगों के मन की गंदगी को साफ कर देते हैँ। इससे उन्हें मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है। यह कहना है श्वेता डालमिया का। पटना की रहने वाली श्वेता कॅरियर, पढ़ाई, नौकरी और बुढ़ापे में होने वाले मानसिक तनाव से दूर कर स्वस्थ करने का काम करती हैं। वह बताती हैं कि मुझे रातों को नींद नहीं आती थी। दिनभर सिर में दर्द रहता था।

दारोगा बनने के बाद भी ट्रांसजेंडर मधु की मुश्किलें कम नहीं हुई, गांव के लोगों ने कर दिया बहिष्कार

पहली ट्रांसजेंडर दारोगा के परिवार को गांव छोड़ने का फरमान, नहीं माने तो की मारपीट बांका के पंजवारा गांव की पहली ट्रांसजेंडर दारोगा ने दर्ज कराई है प्राथमिकी सविता। पटना क्या फायदा हुआ पुलिस की वर्दी पहनने का। हम समाज से लड़कर पहचान के साथ पढ़ाई की। मेहनत की और आज दारोगा के रूप में […]

नौकरी नहीं मिली तो घर बैठे आर्टिफिशियल ज्वेलरी से 42 वर्षीय रीना बनाई अपनी कंपनी

रास्ते कभी बंद नहीं होते, बस मंजिल तक पहुंचने का रास्ता बदलना होता है सविता। पटना 42 वर्षीय रीना कुमारी मोतियों की ज्वेलरी बनाकर उद्वमियता के क्षेत्र में अलग पहचान बना रही हैं।वह पर्ल, कुंदन फ्रैबिक के डिजाइनर आर्टिफिशियल ज्वेलरी बनाती हैं और देशभर में घूम-घूमकर बेच रही हैं ऑनलाइन फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब भी […]

कहने के लिए छह बच्चे, बेटा दारोगा, खुद आर्मी से सेवानिवृत्त पर देखने वाला कोई नहीं,जीवन के अंतिम पलों को वृद्धाश्रम में गुजार रहे अजब लाल

सविता। पटना तीन बेटा, तीन बेटी, बेटी। एक बेटा दारोगा, खुद आर्मी से सेवानिवृत्त हैं और आज वृद्धाश्रम में जिन्दगी गुजारनी पड़ रही है। बेटा-बेटी बाट जोहते-जोहते आंखें पथरा गई है। लेकिन, कोई देखने नहीं आता। जिन्दगी के आखिरी पलों को बस काट रहे हैं। यह कहानी है वैशाली के महुआ के रहने वाले 70 […]

पढ़ाई के लिए नहीं थे पैसे, काम की तलाश में घर से भागे, हैदराबाद जाकर मछली पालन सीखा और चार साल में मयंक बन गए 50 लाख रुपए के मालिक

बिहटा के मीठापुर के रहने वाले मयंक 24 की उम्र में 50 लाख रुपए के मालिक हैं, वह सिर्फ मछली पालन करके। महज चार साल में सफल उद्यमी बनकर दूसरों के लिए मिसाल बन गए हैं। आज से चार साल पहले पैसे की तंगी की वजह से इंटर में पढ़ाई छूट गई थी। मयंक ने तनाव में घर बैठने के बजाय काम की तलाश करनी शुरू कर दी। इसके लिए घर से भागना पड़ा। वह काम ढूंढ़ते-ढूंढ़ते हैदराबाद पहुंच गए। वहां पहुंचे तो युवाओं को बायो फ्लॉक विधि से मछली पालन करना सिखाया जा रहा था।

अमेरिका का ऐसा स्कूल जहां बच्चे बड़ों के साथ रहकर प्रकृति और पर्यावरण से जुडते हैं

संस्मरण-2 हमारे देश के बच्चे गर्मियों की छुट्टियों में दादी-नानी के घर नहीं जाया करते थे। बच्चे गांव में जाकर नदी, पोखर, खेत, खलियान और पेड़-पौधों से जुड़त थे। समय के साथ दादी-नानी का घर भी बदल गया है। अब अधिकतर बच्चों के दादी-नानी घर भी शहरों में होते हैं। बच्चे नानी-दादी घर जाने के […]

अमेरिका अपने बागवानों की पनाह में भर रहा सफलता की उड़ान

अमेरिका यात्रा- संस्मरन भाग-1 संयुक्त राष्ट्र अमेरिका विकसित देशों की श्रेणी में सबसे आगे हैं। हो भी क्यों न यहां का न्यूनतम मजदूरी 8 डॉलर प्रति घंटा है। यानी एक आदमी प्रति दिन का 64 डॉलर कमा रहा है भारतीय रुपए में लगभग पांच हजार रुपए। मैँ पिछले 12 दिनों से अमेरिका में हूं।सबसे पहले […]

कोई गरीब भूखा न सोये, इसलिए मात्र 15 रुपए में भरपेट खाना खिला रहे 68 वर्षीय विजय कुमार

  बचपन में भूखे सोने के दर्द ने गरीबों को सस्ते दर पर खाना खिलाना और पिता की मौत पर दवा नहीं मिलने की घटना से मिली सीख और बन गए गरीबों के मसीहा पीएमसीएच, गांधी मैदान, स्टेशन, मौर्या लोक और गायघाट के पास गरीबों को15 रुपए भरपेट भोजन कराते हैं विजय कुमार कुमार बचपन […]

46 साल की उम्र में कैंसर को हराकर महिलाओं और बच्चों को तकनीक से जोड़ रही मीनम संजीव कुमार

शादी के 15 साल तक बच्चा नहीं होने पर लोग देते थे ताने, लेकिन पति ने कभी साथ नहीं छोड़ा पति के भरोसे और साथ की वजह से कैंसर जैसी बीमारी को हराया और आज महिला सशक्तीकरण के लिए कर रही हैं काम शादी के बाद 15 सालों तक बच्चा का नहीं होना, महिला के […]

रिटायरमेंट के बाद मदन सिंह ने खेती में ढूंढ़ा स्वस्थ रहने का तरीका, जैविक खेती से हर दिन उपजा रहे 200 किलो शिमला मिर्च

रिटायरमेंट के बाद यह महसूस हुआ कि हम अब तक सिर्फ दूसरों के लिए कमाते रहे। अपनी खुशी कहीं खो ही गई थी। खुश रहने के लिए स्वास्थ्य का स्वस्थ होना बहुत जरूरी है। अच्छे स्वास्थ्य के लिए खेती से अच्छा विकल्प कुछ हो ही नहीं सकता है। इस सोच ने पटना के संपतचक के डीएसपी से रिटायर्ड मदन सिंह को खेती के लिए प्रेरित किया। वह अभी 63 साल के हैं। इस उम्र में पूरी तरह स्वस्थ ही नहीं है बल्कि बुजुर्गों को स्वस्थ रहकर समाज के लिए उत्तरदायी बने को प्रेरित कर रहे हैं।

छत पर बागवानी कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही बबीता सिन्हा

हम शहरों में गांव और गमलों में खेत-खलिहान ढूंढ़ते हैं। शहरों के बढ़ते दायरे के बीच भी आप छोटे-छोटे प्रयासों से हरियाली ला सकते हैं। ऐसा ही एक प्रयास कर रही हैं पटना के भट्‌टाचार्य रोड में रहने वाली बबीता सिन्हा। 48 वर्षीय बबीता सिन्हा शौक के लिए छतों पर बागवानी लगायी थी। यह शौक […]

चालीस की उम्र पार करने वाले लोगों के लिए दूरस्थ शिक्षा एक सशक्त माध्यम

डॉ भीम राव अम्बेडकर ने कहा था कि शिक्षा शेरनी का दूध है जो जितना पियेगा, उतना ही अधिक दहाड़ेगा। लेकिन आज वरीय नागरिकों, महिलाओं और कामकाजी लोगों को दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से उच्च शिक्षा का सपना धूमिल होने लगा है। वरीय नागरिक देश के विकास का आधारस्तंभ हैं, जिन्होंने आजीवन राष्ट्र के प्रति […]

जलवायु परिवर्तन से बुजुर्गों के फेफड़े हो रहे कमजोर

बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर जलवायु परिवर्तन का असर जलवायु परिवर्तन के साथ मौसमी उलटफेर और अतिरेक की घटनाओं में वृद्धि हो रही है। गर्मियों में लंबे समय तक तापमान अधिक और हवा की नमी कम हो जाती है जबकि सर्दियों के समय तापमान बहुत कम हो जाता है। जंगलों में अगलगी और वायु प्रदूषण में […]

शहद के औषधीए गुणों ने 68 वर्षीय गिरिराज किशोर डालमिया को सबसे बड़ा व्यापारी बनाया

आये थे पटना में नौकरी की तलाश में, बन गये मधु के सबसे बड़े व्यापारी गिरिराज किशोर डालमिया, मधु प्रोसेसिंग में कमाया नाम एक साल में 24 टन शहद का कर रहे हैं प्रोसेसिंग और पैकेजिंग उम्र 68 साल और काम करने के लिए जुनून देखते बनती है। उत्साह और उमंग से लवरेज व्यक्ति का […]

छत पर बागवानी कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही 48 वर्षीय बबीता सिन्हा

हम शहरों में गांव और गमलों में खेत-खलिहान ढूंढ़ते हैं। शहरों के बढ़ते दायरे के बीच भी आप छोटे-छोटे प्रयासों से हरियाली ला सकते हैं। ऐसा ही एक प्रयास कर रही हैं पटना के भट्‌टाचार्य रोड में रहने वाली बबीता सिन्हा। 48 वर्षीय बबीता सिन्हा शौक के लिए छतों पर बागवानी लगायी थी। यह शौक उनका जुनून बन गया। अब छत पर ही सभी प्रकार की सब्जियों की खेती कर रही हैं।

बेटी ने किया प्रेरित किया तो 42 साल की उम्र में स्वीमिंग सीखने लगी जयंती ओझा

शादी के बाद खेलना छोड़ दिया था, बच्चों और परिवार की जिम्मेवारियां निभाने में रह गई स्वीमिंग से खुद को रखती है फिट और दूसरे को भी कर रही है प्रेरित सीखने की कोई उम्र नहीं होती है। आदमी जिम्मेवारियों में खुद को भूलने लगता है, लेकिन पटना के किदवईपुरी की रहने वाली जयंती ओझा […]

मां बनने की कोई उम्र नहीं होती, औरत तो जन्म से मां ही होती है

गर्भावस्था के दौरान कई तरह की परेशानियां सही, लेकिन अब मेरी पूरी दुनियां ही बदल गई मैं पांच महीने की पंखुरी की मां हूं। मेरी उम्र 45 साल है। इस उम्र में मां बनना मेरे लिए सुखद अनुभूति है। आज मेरी बेटी पांच महीने की है और मैं अपनी बेटी के साथ खुद को जी रही हूं। एक वक्त था, जब लोग मां नहीं बनने के कारण ताने मारते थे। लेकिन मैंने कभी इसे गंभीरता से नहीं लिया। हां एक कसक रहती थी।

बंजर होते खेत को बचाने के लिए पांच दोस्तों ने शुरू किया मत्स्य पालन, पपीते और सहजन की खेती

सोन नदी के बालू संग्रहण से खेत हो रहे हैं बंजर, इन खेतों में कभी गेहूं, मटर और धान की फसलें लहलहाती थी सोन नदी का बालू सोना की तरह बिकता है। कारोबारी गर्मी में बालू को खरीदकर जमा करते हैँ और फिर बरसात के मौसम में बालू को अधिक कीमत पर बेचते हैं। लेकिन यह बालू जिस जमीन पर रखी जाती है वह बंजर हो जाती है। क्योंकि सोन का बालू मिट्टी में घूलता नहीं है। इसकी वजह से आरा में सोन नदी के किनारे संदेश प्रखंड के सैकड़ों एकड़ जमीन बंजर हो रही है।

पांच क्विंटल अमरूद की हो रही पैदावार

आरा के आयर में एक खेत में 72 किस्म के आम, 16 प्रकार के अमरूद, सेब और अंजीर की खेती अभी हर दिन पांच क्विंटल अमरूद की हो रही पैदावार लोगों को रसायनिक खाद के जहर से बचाने के लिए जैविक तरीके से फलों की खेती शुरू की, आज हर दिन पांच क्विंटल अमरूद, चार क्विंटल पपीता और बेर का कर रहे हैं उत्पादन आठ लोगों को सीधे तौर जॉब दिए हैं। गाय के गोबर से बनाते हैं जैविक खाद, जैविक चटनी, जैविक कीटनाशी का करते हैं इस्तेमाल

बुजुर्गों-के-लिए-विशेष-ओपीडी-और-जेरिएट्रिक-वार्ड-की-है-जरूरत

बुजुर्गों के लिए विशेष ओपीडी और जेरिएट्रिक वार्ड की है जरूरत

साल 2050 तक देश की कुल जनसंख्या का 20-22 प्रतिशत बुजुर्गों की संख्या होगी। 60 से अधिक आयु वाले बुजुर्गों के स्वास्थ्य एवं सामुदायिक स्तर पर देखभाल के लिए समुचित एवं साथ प्रयास की जरूरत होगी। इसको देखते हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र से लेकर जिला अस्पतालों में बुजुर्गों के विशेष स्वास्थ्य सुविधाएं देने की पहल हो रही है। लेकिन राज्य में बुजुर्गों के लिए विशेष देखभाल तो दूर अलग से ओपीडी की भी व्यवस्था नहीं है। जबकि बिहार राज्य स्वास्थ्य समिति ने पत्र जारी कर सभी अस्पतालों में जेरिएट्रिक वार्ड खोलने को कहा है ताकि बुजुर्गों को इलाज के लिए घंटों खड़ा रहना न पड़े|

वर्किंग हो या गृहणी बचत के तरीको अपनाने के लिए बनाए फाइनेंशियल प्लानिंग

कम पैसों में घर का चलाने का सलिका महिलाओं से बेहतर कोई नहीं जानता है। हर खर्च का हिसाब करके भी महिलाएं मुसीबत के दिनों के लिए पैसे बचा लेती हैं। लेकिन यह पैसा वह अपने पति और बच्चों के लिए बचाती है। महिलाएं आज पुरुषों के साथ कदमताल मिलाकर चल रही है। इसके बाद भी महिलाएं अपना कमाया हुआ पैसा पुरुषों के खाते में जमा कर देती हैं। राष्ट्रीय फैमिली हेल्थ सर्वे 2020 के अनुसार बिहार में 76.7 प्रतिशत महिलाओं का बैंक में खाता है।

देसी बीजों से मोटे अनाजों की खेती और मार्केटिंग कर रहे 56 वर्षीय आनंद मुरारी

बीज जितना छोटा होता है, वह उतना ही देसी होता है मोकामा में मोटे अनाजों के फायदे बताने के लिए करते हैं खिचड़ी और खीर पार्टी

18 से 65 साल की उम्र तक बेफिक्र होकर करें रक्तदान

18 से 65 साल की उम्र तक बेफिक्र होकर करें रक्तदान

रक्तदान को महादान कहा गया है। जब तक कोई बीमारी न हो, रक्तदान करते रहे। यह किसी भी जिन्दगी बचा सकती है। मां ब्लड बैंक के निदेशक डॉ उपेन्द्र प्रसाद सिन्हा बताते हैं 18-65 साल की उम्र तक बेफिक्र होकर रक्तदान करना चाहिए। सिर्फ रक्तदान ही नहीं बल्कि खून की कमी शरीर में न हो इसका भी ध्यान रखना चाहिए। इसके लिए भरपूर पोषक तत्वों वाला भोजन करना चाहिए। पेट के कीड़े भी खून नहीं बनने देते हैं

पचास की उम्र में खेती का जज्बा लाजवाब, 42 एकड़ जमीन पर ड्रैगन फ्रुट, पपीता और सहजन की खेती कर गांव की बदल रहे तस्वीर

रोजी-रोटी की तलाश में आदमी अपनी जड़ों से दूर होने लगता है, लेकिन जब उसे सुकून की जरूरत महसूस होती है तो गांव की तरफ ही रुख करता है। सुकून के इसी पल को तलाश में जब जितेन्द्र सिंह गांव आए तो मिट्‌टी की सौंधी खुशबू ने उन्हें जाने नहीं दिया। जितेन्द्र सिंह आज गांव में रहकर खेती को नवाचार से जोड़कर नया आयाम देने की कोशिशों में जुटे हैं।

अम्बेडकर प्रेरणा दल बनाकर दलित बच्चों में शिक्षा, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता का कर रहा संचार

आज भी किसी बच्चे का दलित होना श्राप की तरह देखा जाता है। जिस प्रकार में असमानता की रेखा खिंची हुई है वहां गरीब होकर दलित होना किसी सजा से कम नहीं है। दलित बच्चों की इस पीड़ा को सिर्फ ही दूर कर सकती है। बिहार में ऐसे ही 5 हजार बच्चों का अम्बेडकर प्रेरणा दल बनाकर फादर जोस क्रांति लाने की मुहिम में जुटे हैं। फादर जोस बताते हैं बांका, जमुई, नवादा और शेखपुर में आज भी दलित बच्चे मूलभूत सुविधाओं से कोसो दूर हैं।

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