15 सालों से भूले भटके लोगों को अपनों से मिलवा रहे हैं सुमित

1685 बच्चे, महिला, बुजुर्ग और मानसिक दिव्यांग लोगों को घर पहुंचा चुके हैं सविता। पटना समस्तीपुर के सुमित कुमार पिछले 15 सालों से भूले-भटके बच्चे, बुजुर्ग महिला और मानसिक दिव्यांग लोगों को ढूंढ़कर घर पहुंचाने के काम में लगे हैं। कई बार एक बच्चे का घर ढूंढने में साल दो साल भी लग जाते हैं, […]

महिला उद्यमियों के लिए फाइनेंस की राह आसान बनाती सिडबी की महाप्रबंधक अनुभा प्रसाद

बिहार में आज भी ऊंच पदों पर महिलाओं की सहभागिता नगन्य है। मैं कई जगहों पर अकेली महिला वक्ता के रूप में होती हूं। इसका फायदा भी मिलता है कि महिलाओं को लोग ध्यान से सुनते हैं, लेकिन इस फासले को कम करना होगा। जिस संस्थान में महिलाएं ऊंच पदों पर हैं, वह काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है। आज मैं कह सकती हूं कि पिछले एक साल में सिडबी को मैंने तीगुना व्यवसाय वाला बैंक बना दिया है। यह कहना है सिडबी बिहार की पहली महाप्रबंधक अनुभा प्रसाद का। वह बताती हैं कि उद्यमियता के क्षेत्र में महिलाओं का भविष्य उज्ज्वल है। बस महिलाओं को फाइनेंस की बारिकियों को समझना होगा। बिहार में महिला उद्यमियों को आसानी से फाइनेंस मिल जाए, इस पर फोकस करके काम कर रही हैं। मैंने जनवरी 2023 को सिडबी बिहार-झारखंड हेड के रूप में ज्वाइन की।

बुढ़ापा का मतलब बेरंग जिन्दगी नहीं, बल्कि पार्टियों में सलीके से सज-संवर जाए

बुढ़ापा का मतलब बेरंग जिन्दगी नहीं, बल्कि पार्टियों में सलीके से सज-संवर जाए : प्रोफेसर टोनी शर्मा वृद्धावस्था का मतलब मौसम के सभी रंगों को खुद में समेटना और जीना होता है। लेकिन कोई भी व्यक्ति जैसे ही 60 की उम्र पार करता है।

प्रकृति, प्रणायाम और सूक्ष्म आसन से स्वस्थ जीवन का भरपूर लुत्फ उठाए बुजुर्ग

चालीस की उम्र पार करते ही स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं सामने आने लगती है और 60 पार होते के प्रतिरोधक क्षमता घटने लगती है और हडि्डयां जवाब देने लगती है। वृद्धावस्था में भी स्वस्थ रहने के लिए योग का सहारा लेना चाहिए। उम्र के इस पड़ाव पर हडि्डयों से संबंधित समस्या सबसे आम होती है। घुटने, कमर और अन्य जगहों पर दर्द से लोगों का जीना हराम हो जाता है। इससे बचने के लिए बुजुर्गों को सुक्ष्म अभ्यास करना चाहिए।

महिलाओं को कितनी कैलोरी ऊर्जा की जरूरत होती है?

महिलाएं खुद से ज्यादा परिवार के बारे में सोचती हैं। चाहे खाने-पीने का सामान हो या फिर शौक पूरा करने की बात। उनके लिए परिवार ही प्राथमिकता में होता है। घर परिवार का ध्यान रखते हुए कब वह अपनी जीवन शैली खराब कर लेती है, यह पता भी नहीं चलता। 18-45 साल की उम्र में महिलाएं खुद को कैसे स्वस्थ रहे यह बता रही डायटिशियन डॉ विद्या। डॉ विद्या बताती हैं कि अपनी दिनचर्या को ठीक करने के लिए हर महिला को अपना डायट प्लान करना चाहिए।

अभी तो मैंने चलना सीखा है हौसलों की उड़ान अभी बाकी है : उषा झा

अभी तो मैंने चलना सीखा है, हौसलों की उड़ान अभी बाकी है। यह कहना है 60 वर्षीय उषा झा का। उषा मधुबनी पेंटिंग की बेहतरीन कलाकार के साथ बिहार में महिला उद्यमियों की प्रेरणा है। बिहार महिला उद्योग संघ की अध्यक्ष होने के साथ एक सफल उद्यमी के रूप में जानी जाती हैं। उन्होंने मधुबनी पेंटिंग के माध्यम से बिहार से विदेशों में अपनी धाक स्थापित की हैं और गर्व से कहती हैं कि कला का हुनर है तो आप कहीं भी जा सकती हैं। वह बताती हैं कि वह मिथिलांचल क्षेत्र की हैं, इस वजह से इस विधा से वाकिफ थी। 27 साल की उम्र में मधुबनी पेंटिंग से आसमा छूने का सपना देखा और प्रोफेशनल तरीके से मधुबनी पेंटिंग बनाना सीखा। लेकिन, यह हुनर उनकी असली पहचान बन जाएगी, यह कभी नहीं सोचा था।

मुंगेर की महिलाएं बकरी के दूध से बना रही साबुन और विदेशों में कर रही मार्केटिंग

मुंगेर के 255 गांवों की 33 हजार से अधिक महिलाएं बकरी पालन कर अपनी किस्मत बदल रही हैं। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की महिलाएं बकरी का मीट, दूध के साथ बीट की खाद बनाती ही हैं, लेकिन इससे भी अधिक पैसा बकरी के दूध से साबुन और ब्यूटी प्रोडक्ट बनाकर कमा रही है। महिलाएं हर महीने का 20-25 हजार रुपए तक कमा लेती हैं। अब बकरी के दूध से बने साबुन की विदेशों में मार्केटिंग कर रही है।

मुजफ्फरपुर, वैशाली, दरभंगा की 10 हजार से अधिक महिलाएं सौर उद्यमी बनकर हो रही समृद्ध

सौर उद्यमी बनकर महिलाएं हर महीने कमा रही 22 से 25 हजार रुपए खुद के खेतों के साथ दूसरे के खेतों में पटवन करती हैं और धान, गेहूं के अलावे करती हैं सब्जियों की खेती सविता। पटना जीविका दीदियां सौर उद्यमी बनकर आर्थिक रूप से सबल बन रही हैं। सौर उद्यमी के तौर पर महिलाएं […]

पति से धोखा मिला, कानून की पढ़ाई कर वकील बनी, इंसाफ मिला, अब चौथे स्टेज के कैंसर को आभा चौधरी ने हराया

मटुक नाथ चौधरी की पूर्व पत्नी के जिन्दादिली की कहानी, आठ साल से दर्जनों पीड़ित महिलाओं को दिला चुकी हैं इंसाफ , डॉक्टरों ने कहा था उम्र अधिक है, बचा पाना मुश्किल होगा, लेकिन आभा चौधरी ने हार नहीं मानी, नियमित दवा और परहेज से कैंसर पर विजयी हासिल की सविता। पटना जिन्दगी जिन्दादिली का […]

सभ्य समाज के लिए सरकार और समाज बुजुर्गों के लिए एक ऐसी जगह बनानी होगी जहां वह अकेलापन महसूस न करे : डॉ सत्यजीत सिंह

हमें बदलाव के लिए तैयार होना होगा। बुजुर्गों को अपने लगाव के लिए बच्चों का कॅरियर नहीं मारना चाहिए। हममें से बहुत सारे लोग हैं जो बिजनेस डॉक्टर वकील और इंजीनियर्स हैं। हमें इस चीज की तैयारी करनी होगी कि हम आगे बढ़ेंगे बच्चे हमारे बाहर जाएंगे तो हम कैसे रहेंगे और उसके लिए संस्था होनी चाहिए। उनके बच्चे बाहर चले गए हैं वह कैसे एक साथ रहेंगे, जिससे उन्हें अकेलापन न महसूस हो। यह अन्याय होगा कि बच्चे माता-पिता के लिए कॅरियर को छोड़ दें, पढ़ाई छोड़ दें और बुजुर्गों की सेवा में लग जाए।

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